कुशीनगर जिले के रामकोला थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। गन्ना लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आई 17 वर्षीय छात्रा अमीषा की इलाज के दौरान मौत हो गई। बीते 28 फरवरी को हुए इस हादसे के बाद छात्रा का इलाज गंभीर अवस्था में संजय गांधी पीजीआई, लखनऊ में चल रहा था, जहां सोमवार देर रात उसने दम तोड़ दिया। अमीषा की मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया, वहीं मंगलवार को ग्रामीणों ने शव लेकर रामकोला थाना परिसर पहुंचकर आरोपी ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

घटना का विवरण — स्कूल जाते वक्त हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, रामकोला थाना क्षेत्र के बमनौली–रामकोला–नौरंगिया मुख्य मार्ग पर स्थित श्यामा देवी पब्लिक स्कूल के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ था। मृतका अमीषा अपने भाई ऋषभ को लेने के लिए साइकिल से स्कूल जा रही थी। तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रही एक गन्ना लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि अमीषा साइकिल समेत सड़क पर गिर पड़ी और ट्रॉली के नीचे आ गई। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला और तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और फिर संजय गांधी पीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया।
इलाज के दौरान हुई मौत, गांव में मचा कोहराम
डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन गंभीर सिर और रीढ़ की हड्डी की चोटों के कारण सोमवार देर रात अमीषा ने दम तोड़ दिया। अमीषा की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, घर में कोहराम मच गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता ने बताया कि अमीषा परिवार की सबसे होनहार बेटी थी और इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही थी। उसकी मौत ने परिवार की उम्मीदों को तोड़ दिया है।
गांव में भी गम का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अमीषा न सिर्फ पढ़ाई में आगे थी बल्कि सामाजिक रूप से भी बहुत सक्रिय थी। उसकी असामयिक मौत से पूरा इलाका सदमे में है।
गुस्साए ग्रामीण पहुंचे थाने — कार्रवाई की उठी मांग
मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन अमीषा का शव लेकर रामकोला थाना परिसर पहुंचे। उन्होंने आरोपी ट्रैक्टर चालक के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज करने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि चालक ने कान में ईयरफोन लगाकर तेज रफ्तार में ट्रैक्टर चला रहा था, जिससे यह हादसा हुआ।
ग्रामीणों ने कहा कि ट्रैक्टर चालक की लापरवाही के कारण एक मासूम की जान चली गई, लेकिन प्रशासन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने थाने पर नारेबाजी भी की।
दुर्घटना के बाद चालक और ट्रैक्टर को ग्रामीणों ने पकड़ा
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए आरोपी ट्रैक्टर चालक को पकड़ लिया था और ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत पुलिस के हवाले कर दिया था। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि चालक पर सख्त धाराओं में कार्रवाई नहीं की गई, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी।
पुलिस प्रशासन ने दी कार्रवाई का आश्वासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ खड्डा और थाना प्रभारी रामकोला मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने परिजनों को न्याय का भरोसा दिलाया और कहा कि मामले की गहराई से जांच कर दोषी चालक पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
थाना प्रभारी ने बताया कि चालक के खिलाफ धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाना), 304A (लापरवाही से मृत्यु कारित करना) और 337 (दूसरों को चोट पहुंचाना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में यदि यह पाया गया कि चालक नशे में था या ईयरफोन लगाकर वाहन चला रहा था, तो धारा को बढ़ाया जाएगा।
मृतका के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर
परिजनों के अनुसार, अमीषा गरीब किसान परिवार से थी। पिता मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अमीषा तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी और परिवार की उम्मीदों का केंद्र थी। उसकी पढ़ाई और जीवन के सपने अधूरे रह गए। परिवार अब प्रशासन से आर्थिक सहायता की गुहार लगा रहा है।
स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने भी जिला प्रशासन से आर्थिक मदद देने की मांग की है। उनका कहना है कि मृतका के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से मुआवजा दिया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी को सख्त सजा मिले।
ग्रामीणों का आरोप — लापरवाही से बढ़ रहे हादसे
ग्रामीणों का कहना है कि बमनौली–रामकोला मार्ग पर आए दिन ट्रैक्टर, ट्रक और अन्य भारी वाहनों की तेज रफ्तार से दुर्घटनाएं होती रहती हैं। स्कूल के पास कोई स्पीड ब्रेकर नहीं है और न ही ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पुलिस की नियमित तैनाती होती है। ग्रामीणों ने सड़क सुरक्षा के उपायों की मांग करते हुए कहा कि प्रशासन को स्कूल के आसपास चेतावनी बोर्ड, स्पीड लिमिट संकेतक और सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया शव
पुलिस ने छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और रिपोर्ट आने के बाद परिजनों को सौंप दिया। अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट पर भावनात्मक माहौल में किया गया। हजारों लोगों ने नम आंखों से अमीषा को अंतिम विदाई दी।
प्रशासन ने दिए आश्वासन
जिला प्रशासन ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जिला अधिकारी कुशीनगर ने परिवार को हर संभव मदद देने का निर्देश दिया है। मृतका के परिजनों को आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं, क्षेत्र में ट्रैफिक निगरानी बढ़ाने के लिए पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए हैं।
सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल
अमीषा की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सड़क पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते और वाहन चालकों पर सख्ती बरती जाती, तो यह हादसा टल सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ना सीजन के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की भरमार रहती है और अधिकांश चालक बिना प्रशिक्षण या लाइसेंस के वाहन चलाते हैं। इस पर सख्त नियंत्रण जरूरी है।
कुशीनगर की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासन और समाज के लिए चेतावनी है कि सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। 17 वर्षीय अमीषा का जाना केवल एक जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक सपने का बिखरना है।
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