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Devotees Flock Ayodhya : अयोध्या में नववर्ष पर भक्तों की भारी भीड़

अयोध्या (01 जनवरी 2026) – अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही राम नगरी अयोध्या में आस्था और भक्ति का अद्भुत सैलाब देखने को मिला। नए साल की पहली सुबह से ही शहर के मंदिर परिसर और सरयू नदी के तट पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु अपने आराध्य प्रभु श्रीरामलला के दर्शन, पूजा-अर्चना और दीपदान के लिए सुबह से ही मंदिरों की ओर रुख कर रहे थे।

नववर्ष की शुरुआत के अवसर पर श्रद्धालु न केवल व्यक्तिगत सुख-शांति की कामना कर रहे थे, बल्कि पूरे देश और समाज की समृद्धि के लिए भी प्रार्थना कर रहे थे। सरयू तट पर भोर में पवित्र स्नान का क्रम चलता रहा। श्रद्धालु पानी में डुबकी लगाकर अपने तन-मन को पवित्र कर रहे थे और दीपदान कर भगवान श्रीराम के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त कर रहे थे।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में जय श्रीराम के उद्घोष, घंटा-घड़ियाल और शंखनाद की आवाज़ ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मंदिर परिसर में भक्तजन देर तक प्रार्थना करते रहे और अपने पूरे परिवार के लिए आशीर्वाद की कामना की।

श्रद्धालुओं का कहना था कि नववर्ष के पहले दिन प्रभु श्रीराम के चरणों में शीश नवाने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हरियाणा से आए रवि कुमार ने बताया, “मैं हर साल नववर्ष के अवसर पर अयोध्या आता हूँ। यह अनुभव आत्मा को संतुष्टि और मन को शक्ति देता है।” वहीं, महाराष्ट्र की श्रद्धालु स्मिता पाटिल ने कहा, “यहाँ की आस्था और वातावरण हमें अपने जीवन में नैतिकता और आध्यात्मिक ऊर्जा बनाए रखने की प्रेरणा देता है।”

अयोध्या प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्य मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष मार्ग बनाए गए हैं, जबकि मंदिर परिसर में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग मार्गों का प्रबंध किया गया है। प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन और पूजा कर सकें।

राम नगरी अयोध्या का यह दृश्य यह दर्शाता है कि यह शहर आज भी सनातन संस्कृति, धार्मिक विश्वास और राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख केंद्र है। महंत रमेश दास, मुख्य पुजारी हनुमानगढ़ी, ने कहा, “अयोध्या में हर नए वर्ष की शुरुआत आध्यात्मिक संकल्प के साथ होती है। यह श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यहाँ से हर वर्ष की शुरुआत एक नई सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक उत्साह के साथ होती है।”

नववर्ष के अवसर पर शहर की अर्थव्यवस्था भी सक्रिय रही। स्थानीय दुकानदार, होटल और ढाबे श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए पूरी तरह तैयार थे। तंबू, भंडारे और अन्य सेवाओं की व्यवस्था भी प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों द्वारा सुनिश्चित की गई थी। श्रद्धालुओं ने स्थानीय संस्कृति और परंपरा के अनुसार विभिन्न प्रकार के प्रसाद और धार्मिक सामग्रियाँ खरीदी।

अयोध्या में इस वर्ष नववर्ष का यह भव्य दृश्य इस बात का प्रमाण है कि भक्ति, आस्था और धार्मिक चेतना आज भी देशवासियों के जीवन में गहराई से जमी हुई है। यह न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज और संस्कृति के प्रति निष्ठा और आदर्शों का प्रतीक भी है। श्रद्धालु न केवल अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहे थे, बल्कि अपने कृत्यों और सोच में नैतिकता और आध्यात्मिकता बनाए रखने का संकल्प भी ले रहे थे।

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