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महाराजगंज के करदह गांव में मनरेगा में धांधली, कामगारों के नाम पर फर्जी रोल तैयार

महाराजगंज जनपद के निचलौल ब्लॉक में मनरेगा योजना में हो रहे भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का माहौल बना दिया है। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और सख्त निर्देशों के बावजूद मनरेगा कार्यों में धांधली की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। इस बार करदह गांव में चकबंदी कार्य के दौरान बड़े स्तर पर नियमों को ताक पर रखकर फर्जीवाड़ा किए जाने का आरोप लगा है।

स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, करदह गांव में शिवरतन के खेत से दक्षिण की ओर चकबंदी कार्य चल रहा है। मनरेगा के तहत होने वाले इस कार्य में वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति न के बराबर है, जबकि मास्टर रोल पर मजदूरों के नाम और फोटो जोड़कर उन्हें कार्यरत दिखाया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि फोटो से फोटो जोड़कर मास्टर रोल तैयार किया गया है, जिससे भुगतान सीधे फर्जी तरीके से किया जा सके।

बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से यह मनमानी लगातार जारी है, लेकिन निचलौल ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मूकदर्शक बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मामला पूरी तरह से अधिकारियों और ग्राम रोजगार सेवक की मिलीभगत से किया जा रहा है, जिसके कारण सरकार द्वारा मनरेगा के माध्यम से गरीब और बेरोजगारों को दिया जाने वाला रोजगार केवल कागज़ों में सिमट कर रह गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मनरेगा में जारी इस तरह के फर्जीवाड़े से लाखों रुपये की बंदरबांट हो रही है। मजदूरों की जगह कागज़ी दस्तावेज़ों पर काम दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरा या बेहद धीमी गति से चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी बड़ी योजना पर इस तरह का भ्रष्टाचार सरकार की छवि को खराब कर रहा है और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ नहीं पहुंच पा रहा।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तुरंत इस मामले की जांच कर कठोर कार्रवाई करे, ताकि ब्लॉक और ग्राम स्तर पर फैले भ्रष्टाचार की जड़ को खत्म किया जा सके। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भ्रष्टाचारियों के हौसले और बढ़ जाएंगे और सरकारी योजनाएं पूरी तरह से प्रभावित होंगी।

निचलौल ब्लॉक में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने एक बार फिर मनरेगा की निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।

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