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Illegal Mining Action : महराजगंज में ठूठीबारी क्षेत्र में अवैध खुदाई पर बड़ी पुलिस कार्रवाई, 5 ट्रैक्टर और जेसीबी सीज

महराजगंज से रिपोर्ट

महराजगंज जनपद के ठूठीबारी थाना क्षेत्र में अवैध खनन और मिट्टी खुदाई के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भरवालिया सिवान इलाके में अवैध रूप से मिट्टी और बालू की खुदाई की सूचना पर पुलिस ने त्वरित छापेमारी कर पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक जेसीबी मशीन को जब्त कर लिया। प्रशासन ने इस कार्रवाई को खनन माफिया के खिलाफ सख्त संदेश बताया है।


अवैध खनन की सूचना मिलते ही हरकत में आई पुलिस

मिली जानकारी के अनुसार, ठूठीबारी थाना क्षेत्र के भरवालिया सिवान गांव में देर रात कुछ वाहन अवैध खुदाई कर रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
पुलिस टीम ने खेतों और नदी किनारे चल रही खुदाई को रोकते हुए 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली और 1 जेसीबी मशीन को मौके पर ही सीज कर दिया

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई “अवैध खनन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा” के तहत की गई है।


अवैध खनन पर रोक के बावजूद नहीं रुक रही गतिविधियां

प्रदेश सरकार द्वारा बार-बार अवैध खनन पर सख्ती के निर्देश जारी किए जाने के बावजूद, सीमावर्ती जिलों में यह धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा।
महराजगंज, जो नेपाल की सीमा से सटा जिला है, वहां बालू और मिट्टी की अवैध खुदाई लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कुछ खनन कारोबारी रात के अंधेरे में नदी किनारे या कृषि भूमि से मिट्टी निकालकर ट्रैक्टरों के जरिए बेचते हैं। इससे न केवल राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि भूमि कटाव और पर्यावरण को भी भारी हानि पहुंचती है।


भरवालिया सिवान: अवैध खुदाई का नया हॉटस्पॉट

भरवालिया सिवान इलाका हाल के महीनों में अवैध खनन का केंद्र बन गया है। यहां कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन को शिकायतें दीं कि खेतों के किनारे और नहरों के पास रात में मशीनों से मिट्टी की खुदाई होती है।
हालांकि, पहले की शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। लेकिन इस बार पुलिस ने सूचना मिलते ही त्वरित कदम उठाया, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है।


पुलिस ने पकड़े 5 ट्रैक्टर और 1 जेसीबी

ठूठीबारी थाना प्रभारी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान मौके पर पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली और एक जेसीबी मशीन पकड़ी गई। सभी वाहनों को थाने लाया गया है और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस का कहना है कि जब भी इलाके में ऐसी गतिविधियों की सूचना मिलेगी, तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
थाना प्रभारी ने कहा,

“अवैध खनन में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वाहनों को सीज कर अग्रिम जांच शुरू कर दी गई है।”


प्रशासन की ओर से सख्त निर्देश

महराजगंज के जिलाधिकारी ने पहले ही खनन से संबंधित सभी थानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध खनन के मामलों में शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति अपनाई जाए।
इस कार्रवाई के बाद डीएम कार्यालय ने भी संकेत दिए हैं कि जिले में अवैध खनन से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होगी।

सूत्रों के मुताबिक, जिला खनन अधिकारी को भी मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।


अवैध खनन का पर्यावरणीय असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अवैध खुदाई से क्षेत्रीय पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
भूमि का कटाव, भूजल स्तर में गिरावट, और बंजर भूमि का विस्तार इसके प्रत्यक्ष परिणाम हैं।

पर्यावरणविद् डॉ. विवेक तिवारी का कहना है,

“मिट्टी की बिना अनुमति निकासी न केवल भूमि की उपजाऊ शक्ति को खत्म करती है, बल्कि नदियों और नालों के प्राकृतिक प्रवाह को भी प्रभावित करती है। इस पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।”


स्थानीय लोगों की राय

भरवालिया सिवान के ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई का स्वागत किया है।
एक ग्रामीण रमेश यादव ने बताया,

“रात में जेसीबी से मिट्टी निकालने की वजह से हमारे खेतों के किनारे धंस जाते हैं। कई बार बच्चों और मवेशियों के गिरने की घटनाएं भी हुई हैं। अब जाकर प्रशासन ने कदम उठाया है।”

वहीं एक अन्य किसान, सुरेश वर्मा, ने कहा,

“हम चाहते हैं कि सिर्फ एक बार नहीं, लगातार निगरानी की जाए। वरना यह काम फिर से शुरू हो जाएगा।”


कानूनी पहलू: अवैध खनन है दंडनीय अपराध

भारतीय दंड संहिता और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत बिना अनुमति खनन या मिट्टी खुदाई एक दंडनीय अपराध है।
इसमें जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है।
यदि सरकारी भूमि, नदी या सार्वजनिक क्षेत्र में खुदाई की जाती है, तो यह “राजस्व क्षति” के अंतर्गत भी आता है।

पुलिस ने बताया कि सभी पकड़े गए वाहनों के मालिकों की पहचान की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।


अवैध खनन से सरकार को नुकसान

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अवैध खनन के कारण राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है।
महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती और कुशीनगर जैसे जिलों में यह अवैध कारोबार वर्षों से चल रहा है।

खनन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार,

“हर एक ट्रॉली मिट्टी की सरकारी दर पर रॉयल्टी ली जानी चाहिए, लेकिन अवैध कारोबार के चलते यह पैसा सरकारी खजाने तक नहीं पहुंच पाता।”


जिले में बढ़ी निगरानी

इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने सभी थानों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है ताकि कोई वाहन मिट्टी या बालू की अवैध ढुलाई न कर सके।
जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि

“हमारी प्राथमिकता प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है। जो भी इस कार्य में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।”


जांच जारी, खनन नेटवर्क पर नजर

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह अवैध खुदाई किन लोगों के इशारे पर की जा रही थी।
जानकारी के अनुसार, यह नेटवर्क स्थानीय स्तर पर सक्रिय कुछ खनन ठेकेदारों और ट्रैक्टर मालिकों से जुड़ा हो सकता है।
थाना पुलिस ने खनन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर सभी संदेहास्पद वाहनों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


प्रशासन ने दिए सख्त संदेश

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक दोनों ने संयुक्त रूप से बयान जारी करते हुए कहा कि अवैध खनन में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर सीधे जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

महराजगंज जिले में ठूठीबारी थाना क्षेत्र की यह कार्रवाई प्रशासन की Zero Tolerance Policy का उदाहरण है।
इससे यह संदेश गया है कि अब अवैध खनन या प्राकृतिक संसाधनों की लूट को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्थानीय लोगों में उम्मीद है कि यह सिर्फ एक बार की कार्रवाई न हो, बल्कि एक स्थायी मुहिम बने।
क्योंकि जब तक ऐसे अवैध धंधों पर पूरी तरह रोक नहीं लगेगी, तब तक पर्यावरण, राजस्व और जनहित—तीनों को नुकसान होता रहेगा।

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