कानपुर डीएम का रैन बसेरों पर औचक निरीक्षण, भैरव घाट स्थित आश्रय स्थल में मिली गंभीर खामियां — 24 घंटे में सुधार के निर्देश

कानपुर नगर। बढ़ती ठंड और शीतलहर के बीच कानपुर नगर प्रशासन ने रैन बसेरों (नाइट शेल्टर) की व्यवस्थाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार रात जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शहर के विभिन्न रैन बसेरों का औचक निरीक्षण किया, जिसके दौरान कई जगहों पर अव्यवस्था और लापरवाही उजागर हुई। विशेष रूप से भैरव घाट स्थित रैन बसेरा में हालात बेहद खराब पाए गए, जिससे डीएम ने गहरी नाराजगी जताई और सभी जिम्मेदार अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर सभी खामियां दुरुस्त करने के सख्त निर्देश दिए।
रात करीब 8:15 बजे जिलाधिकारी जब भैरव घाट स्थित रैन बसेरे पहुंचे, तो वहां का दृश्य प्रशासनिक दावों के विपरीत नजर आया। कमरों में गंदगी फैली हुई थी, शौचालयों की स्थिति बेहद खराब थी, और प्रकाश व्यवस्था भी लगभग न के बराबर थी। रैन बसेरे में ठहरे लोगों ने डीएम को बताया कि उन्हें रजाई या कंबल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
कई लोगों ने बताया कि वे अपना कंबल घर से लेकर यहां रुकने को विवश हैं, क्योंकि ठंड से बचने के लिए प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जिलाधिकारी द्वारा अभिलेखों की जांच करने पर यह सामने आया कि इस रैन बसेरे का किसी भी जोनल सेनेटरी ऑफिसर, जोनल अधिकारी या वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अब तक निरीक्षण नहीं किया गया है।
रैन बसेरे के केयरटेकर रामबाबू तिवारी ने बताया कि यहां स्वीपर की कोई तैनाती नहीं है, जिसके चलते सफाई कार्य नियमित रूप से नहीं हो पाता।
रैन बसेरे की क्षमता 50 लोगों की बताई गई, लेकिन वहां की अव्यवस्था और सीमित संसाधनों के कारण लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान खराब व्यवस्था देखकर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने 24 घंटे के भीतर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, रजाई-कंबल की उपलब्धता और शौचालयों की मरम्मत सहित सभी मूलभूत सुविधाएं बहाल करने का आदेश दिया।
डीएम ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा —
“ठंड के मौसम में गरीब और बेसहारा लोगों के लिए रैन बसेरे जीवन-रेखा हैं। इनकी उपेक्षा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन अधिकारियों की लापरवाही पाई जाएगी, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
जिलाधिकारी ने समस्त नोडल अधिकारियों को आदेशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित सभी रैन बसेरों का तत्काल निरीक्षण करें और आवश्यक सुधार सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि ठंड के मौसम में किसी भी स्तर पर जन-सुविधा से जुड़ी लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। यदि कहीं भी कमी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भैरव घाट के निरीक्षण से पहले डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने परमट मंदिर के निकट स्थित रैन बसेरे का भी निरीक्षण किया।
यहां की स्थिति संतोषजनक मिली —
साइट पर अलाव जलता हुआ मिला, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था बेहतर थी, तथा रजाई और कंबल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई थी।
रैन बसेरे में उस समय 18 लोग ठहरे हुए थे, जबकि इसकी क्षमता 20 लोगों की है। समुचित व्यवस्था देखकर डीएम ने संतोष व्यक्त किया और वहां के कर्मचारियों की सराहना की।
कानपुर नगर प्रशासन द्वारा किया गया यह औचक निरीक्षण रैन बसेरों की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। जहां एक ओर कुछ आश्रय स्थलों में व्यवस्थाएं बेहतर हैं, वहीं कई स्थानों पर उपेक्षा और लापरवाही का स्तर चिंताजनक है। जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद अब यह देखना होगा कि अगले 24 घंटे में इन व्यवस्थाओं में कितना सुधार होता है।
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