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जालौन में युवक की डूबने से मौत, अवैध खनन बना हादसे का कारण!

जालौन, उत्तर प्रदेश —

जिले के कदौरा थाना क्षेत्र के महमूद नगर बड़ागांव में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। बेतवा नदी में नहाने गए एक युवक की गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। यह गड्ढा कथित रूप से नदी में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन के कारण बना था। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और खनन माफियाओं की गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण
स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतक युवक रविवार दोपहर अपने दोस्तों के साथ बेतवा नदी में नहाने गया था। नहाते समय वह अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। दोस्तों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण कोई उसे बाहर नहीं निकाल सका। हादसे की सूचना ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को दी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कदौरा पुलिस मौके पर देर से पहुंची, जिससे समय रहते युवक की जान नहीं बच पाई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक की पहचान बड़ागांव निवासी के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक उसकी शादी चार वर्ष पूर्व हुई थी और उसका दो वर्ष का एक पुत्र है। बेटे की मौत की खबर सुनकर परिजनों में कोहराम मच गया। पिता ने रोते हुए बताया कि “हमने कई बार नदी किनारे हो रहे अवैध खनन की शिकायत की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। अगर समय रहते खनन पर रोक लगाई जाती तो मेरा बेटा आज जिंदा होता।”

ग्रामीणों का गुस्सा और प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन पर खनन माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रात के अंधेरे में जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली से लगातार रेत की खुदाई की जाती है, जिससे नदी की प्राकृतिक धारा बदल गई है और कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों में नहाने या मवेशियों के उतरने पर अक्सर हादसे होते रहते हैं।

ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे बेतवा नदी किनारे धरना-प्रदर्शन करेंगे।

प्रशासन की सफाई
उधर, पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची थी और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। वहीं, प्रशासन ने भी अवैध खनन की शिकायतों की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

बाइट: मृतक का पिता (रोते हुए) —
“अगर प्रशासन ने खनन रोक दिया होता तो मेरा बेटा आज जिंदा होता। हमने कई बार कहा कि नदी में खतरनाक गड्ढे बन गए हैं, लेकिन किसी ने नहीं सुना।”

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