जालौन नगर से नववर्ष के अवसर पर एक प्रेरणादायक और मानवीय उदाहरण सामने आया है। जहाँ लोग नए साल का जश्न पार्टी और आतिशबाज़ी के साथ मना रहे थे, वहीं नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रतिनिधि पुनीत कुमार मित्तल ने साल 2026 की शुरुआत गौसेवा से की। उन्होंने न केवल कान्हा गौशाला पहुँचकर गौवंशों को चारा खिलाया, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल के लिए कई अहम निर्देश भी दिए। इस पहल को स्थानीय नागरिकों और गौभक्तों ने “नववर्ष की सच्ची शुरुआत” बताया।

नववर्ष के अवसर पर नगर पालिका परिषद जालौन के चेयरमैन प्रतिनिधि पुनीत मित्तल सुबह-सुबह कान्हा गौशाला पहुँचे। ठंड के इस मौसम में उन्होंने गौवंशों के बीच समय बिताया, उन्हें गुड़, चना और हरा चारा खिलाया। उन्होंने गौशाला के कर्मचारियों से गौवंशों की स्वास्थ्य स्थिति, चारे की उपलब्धता और ठंड से बचाव के इंतज़ामों के बारे में जानकारी ली।
गौशाला परिसर में मौजूद कार्यकर्ताओं और नागरिकों के साथ बातचीत करते हुए पुनीत मित्तल ने कहा —
“गौसेवा हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन प्राणियों की सेवा करें जो मानव समाज के कल्याण में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योगदान करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि गौवंश केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं। इसलिए उनकी देखभाल और सुरक्षा को प्राथमिकता देना प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।
कड़ाके की ठंड और शीतलहर को देखते हुए पुनीत मित्तल ने गौशाला प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी गौवंशों के लिए पर्याप्त अलाव की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि रात के समय तापमान गिरने पर गौशाला परिसर में जूट की बोरियों और फूस से बने आश्रय स्थल तैयार किए जाएं, ताकि कोई भी गौवंश ठंड से प्रभावित न हो।
उन्होंने गौशाला कर्मियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि गायों को समय पर चारा और स्वच्छ पानी मिले तथा बीमार पशुओं की नियमित चिकित्सा की व्यवस्था बनी रहे।
पुनीत मित्तल की इस पहल की स्थानीय नागरिकों ने खुलकर प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि यह कदम समाज को एक सकारात्मक संदेश देता है कि नववर्ष केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का पर्व भी हो सकता है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा —
“जहाँ लोग आतिशबाजी और पार्टियों में व्यस्त थे, वहीं पुनीत मित्तल जी ने गौवंशों के बीच जाकर नया साल मनाकर मानवता की मिसाल पेश की है। ऐसे जनप्रतिनिधि समाज के लिए प्रेरणा हैं।”
भारतीय परंपरा में गौसेवा को सदा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। वेदों और पुराणों में गाय को “कामधेनु” कहा गया है — जो सभी प्रकार की समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। आज के आधुनिक दौर में जब सामाजिक जीवन भाग-दौड़ से भरा है, ऐसे में इस तरह की पहलें समाज को अपनी जड़ों और मानवीय मूल्यों से जोड़ती हैं।
जालौन जैसे नगरों में यह उदाहरण प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल गौशाला प्रबंधन में सुधार होता है, बल्कि आम नागरिकों को भी पशु संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूकता मिलती है।
पुनीत मित्तल ने बताया कि नगर पालिका परिषद गौवंशों के लिए नियमित रूप से हरे चारे, पशु चिकित्सक, और आश्रय स्थलों की व्यवस्था कर रही है। भविष्य में गौशाला में सोलर लाइट व्यवस्था, पानी की टंकी, और स्वास्थ्य मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की योजना भी बनाई जा रही है।
उन्होंने कहा —
“गौसेवा सिर्फ दिखावे का कार्य नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति की आत्मा है। जब तक हमारे नगर की प्रत्येक गाय सुरक्षित नहीं होगी, तब तक विकास अधूरा रहेगा।”
इस पहल ने नगर के युवाओं को भी प्रेरित किया है। कई एनएसएस और एनसीसी कैडेटों ने भविष्य में गौसेवा और सामाजिक कार्यों में भाग लेने का संकल्प लिया। शिक्षण संस्थानों ने इसे एक मॉडल एक्टिविटी के रूप में अपनाने की बात कही, ताकि नई पीढ़ी को सेवा और दया का वास्तविक अर्थ समझाया जा सके।
नववर्ष के मौके पर जालौन नगर पालिका के चेयरमैन प्रतिनिधि पुनीत मित्तल द्वारा की गई यह पहल सिर्फ एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण है। यह दिखाता है कि अगर हर जनप्रतिनिधि समाज के कमजोर और मूक जीवों की जिम्मेदारी उठाए, तो समाज में करुणा और सामूहिक चेतना का विस्तार संभव है।
इस नववर्ष, जालौन ने एक ऐसा संदेश दिया है जो कहता है —
“नया साल सेवा के साथ शुरू हो, तभी उसका असली अर्थ सार्थक होता है।”
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