जालौन से अवैध खनन को लेकर हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। कहटा खंड-1 क्षेत्र में खनन माफिया खुलेआम एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ताक पर रखकर नदी की जलधारा में खनन करता नजर आ रहा है। नियमों की अनदेखी कर ओवरलोड वाहन बेधड़क सड़कों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कहां है?
जालौन जनपद के कहटा खंड-1 में अवैध खनन का खेल लगातार जारी है। आरोप है कि खनन माफिया करन सिंह राजपूत द्वारा एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए नदी की जलधारा के भीतर भारी मशीनों से खनन कराया जा रहा है। सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि खदान के कांटे से ओवरलोड वाहन बिना किसी रोक-टोक के निकल रहे हैं।
नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए नदी के भीतर जेसीबी और अन्य भारी मशीनों से मकड़जाल की तरह रास्ते बनाए गए हैं, ताकि खनन कार्य तेजी से किया जा सके। इससे न केवल नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया दिन ढलते ही और अधिक सक्रिय हो जाते हैं। रात के अंधेरे का फायदा उठाकर जालौन की सीमा पार कर जनपद हमीरपुर की नदी जलधारा में अवैध खनन शुरू कर दिया जाता है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल दी जाती है, जिसका फायदा खनन माफिया उठाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, वहीं दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि संबंधित पट्टाधारक पूर्व में सीबीआई जांच के रडार पर भी रह चुका है, इसके बावजूद खुलेआम अवैध खनन का संचालन किया जा रहा है। लगातार जारी इस गैरकानूनी गतिविधि से नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा हो सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि जिम्मेदार विभाग कब इस पूरे मामले पर संज्ञान लेंगे और कब तक इस अवैध खनन पर प्रभावी रोक लग पाएगी। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसके दूरगामी परिणाम जिले के पर्यावरण और जनजीवन पर पड़ सकते हैं।
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