उरई। जालौन जनपद के उरई शहर से मंगलवार शाम एक चौंकाने वाली और बेहद चिंताजनक घटना सामने आई है। टाउन हाल के पास स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर में एक तेज़ रफ्तार स्कॉर्पियो कार ने अचानक घुसकर ज़बरदस्त टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मंदिर की दीवारें टूट गईं और कई मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इस हादसे में मंदिर के पुजारी की पत्नी घायल हो गईं।

चौंकाने वाली बात यह है कि जिस स्कॉर्पियो ने यह घटना की, उस पर “भाजपा पिछड़ा मोर्चा — जिला उपाध्यक्ष” लिखा हुआ था। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
तेज़ रफ्तार स्कॉर्पियो ने मचाई तबाही
सूत्रों के अनुसार, घटना मंगलवार शाम की है जब जेडीसी बैंक के सामने स्थित शंकरजी मंदिर में सफाई का कार्य चल रहा था। मंदिर के पुजारी की पत्नी उस समय मंदिर परिसर की सफाई कर रही थीं। तभी सामने से आई तेज़ रफ्तार स्कॉर्पियो सीधे मंदिर की दीवार से टकरा गई।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर का एक हिस्सा टूट गया और कई मूर्तियां ज़मीन पर गिरकर टूट गईं। हादसे में सफाई कर रही पुजारी की पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गईं। स्थानीय लोगों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
CCTV कैमरे में कैद हुई पूरी वारदात
मंदिर में लगे CCTV कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि स्कॉर्पियो बड़ी तेज़ रफ्तार में आई और अचानक नियंत्रण खोकर मंदिर में जा घुसी। टक्कर के बाद कार चालक, जो खुद को “भाजपा का जिला उपाध्यक्ष” बता रहा था, बिना रुके मौके से गाड़ी लेकर फरार हो गया।
लोगों में आक्रोश, धार्मिक स्थल पर हादसे से नाराज़गी
घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। लोगों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि धार्मिक स्थल पर इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। कई स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि आरोपी के राजनीतिक प्रभाव को दरकिनार करते हुए सख्त कार्रवाई की जाए।
शहर के लोगों का कहना है कि अगर मंदिर के बाहर कोई श्रद्धालु मौजूद होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पुलिस ने CCTV फुटेज किया कब्जे में
उरई कोतवाली पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर CCTV फुटेज को कब्जे में लिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वाहन और उसके चालक की पहचान कर ली गई है, और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी नेता पर लापरवाही से वाहन चलाने और धार्मिक स्थल को क्षति पहुंचाने का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
सवाल उठे — क्या राजनीतिक प्रभाव बनेगा जांच में बाधा?
स्थानीय लोगों में यह चर्चा तेज़ है कि क्या आरोपी के राजनीतिक रसूख के चलते जांच प्रभावित होगी। कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा बल्कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जब प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा इस तरह की लापरवाही की जाती है और वे बिना डर के फरार हो जाते हैं, तो कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
प्रशासन के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है — देखना होगा कि न्याय कितनी जल्दी और निष्पक्षता से होता है।
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