
भारतीय फिल्म उद्योग को नई उड़ान देने की तैयारी: केंद्र सरकार के दो बड़े फैसले, छोटे शहरों तक बढ़ेंगे सिनेमाघर, AI और नई तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली: भारतीय फिल्म उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने दो अहम फैसले लिए हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शनी (Exhibition) से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने तथा देशभर में विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सिनेमाघरों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक पहल शुरू की है। इन निर्णयों को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंजूरी दी गई।

इस पहल के तहत मंत्रालय ने प्रसिद्ध गीतकार, लेखक और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष प्रसून जोशी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अध्ययन समूह (Study Group) का गठन किया है। इस समूह में फिल्म उद्योग, मीडिया, प्रौद्योगिकी और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। अध्ययन समूह भारतीय फिल्म उद्योग के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों, उभरते अवसरों और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करेगा तथा तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को सौंपेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर उद्योग के दीर्घकालिक विकास के लिए नई नीतियां तैयार की जा सकती हैं।
फिल्म निर्माण में AI और नई तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने फिल्म उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्चुअल प्रोडक्शन, अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) और अन्य डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया है। मंत्रालय का मानना है कि नई तकनीकों के इस्तेमाल से भारतीय फिल्मों की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
इसके अलावा फिल्म निर्माण और वितरण के लिए संस्थागत वित्त (Institutional Finance) उपलब्ध कराने तथा नए फंडिंग मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। लंबे समय से फिल्म निर्माताओं को वित्त जुटाने में आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस क्षेत्र के लिए बेहतर वित्तीय विकल्प तैयार करने की दिशा में काम करेगी।
राज्यों के सहयोग से बनेगा व्यापक नीति ढांचा
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारतीय फिल्म उद्योग के दीर्घकालिक विकास के लिए राज्यों, उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों के सहयोग से एक व्यापक नीति ढांचा तैयार करेगा। इसका उद्देश्य फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शनी से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाना है।
सिनेमाघरों की संख्या बढ़ाने पर विशेष फोकस
देश में सिनेमाघरों की सीमित संख्या लंबे समय से फिल्म उद्योग के सामने एक बड़ी चुनौती रही है। वर्तमान में सिनेमा और थिएटर से जुड़े नियम राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों में लाइसेंस और अनुमति प्रक्रिया अलग-अलग है। इस जटिल व्यवस्था का सबसे अधिक असर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में नए सिनेमाघरों की स्थापना पर पड़ता है।
इसी समस्या के समाधान के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ‘मॉडल स्टेट सिनेमा रेगुलेशंस’ तैयार किए हैं। इन मॉडल नियमों को सभी राज्य सरकारों को अपनाने के लिए भेजा गया है। मंत्रालय राज्यों को इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग भी प्रदान करेगा, ताकि नई मल्टीप्लेक्स और सिंगल-स्क्रीन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल सके।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि इन दोनों पहलों के लागू होने से भारतीय फिल्म उद्योग को आधुनिक तकनीक, बेहतर वित्तीय सहायता और सरल नियामकीय व्यवस्था का लाभ मिलेगा। साथ ही छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में नए सिनेमाघरों की स्थापना को गति मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और दर्शकों को बेहतर मनोरंजन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा होगी मजबूत
केंद्र सरकार का उद्देश्य भारतीय सिनेमा को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाते हुए उसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अध्ययन समूह की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और राज्यों द्वारा मॉडल सिनेमा नियमों को अपनाया जाता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय फिल्म उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इससे फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शनी के पूरे इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और भारतीय फिल्मों के कारोबार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।




