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Honest Secretary Triumphs : ईमानदार सचिव गौतमी कुमारी की पारदर्शी कार्यशैली से खुशहाल किसान

ईमानदार सचिव गौतमी कुमारी की पारदर्शी कार्यशैली से खुशहाल किसान, खाद वितरण में खत्म हुई दलाली

उत्तर प्रदेश के जिला लखीमपुर खीरी के ब्लॉक रमिया बेहढ के अंतर्गत आने वाले लखाही गांव में इन दिनों एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां की खाद्य समिति की सचिव गौतमी कुमारी ने अपनी ईमानदार और पारदर्शी कार्यशैली से किसानों का दिल जीत लिया है।

गांव की खाद्य समिति द्वारा 18 दिसंबर 2025 को यूरिया खाद का वितरण किया गया, जिसमें केवल एक ही दिन में 500 बोरी खाद किसानों के बीच बाँटी गई। पहले यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलती थी और कई बार किसान खाद के लिए कई चक्कर काटते थे। लेकिन सचिव गौतमी कुमारी ने इस व्यवस्था में सुधार लाते हुए इसे व्यवस्थित, पारदर्शी और निष्पक्ष बना दिया है।

लाइन से वितरण, नंबर सिस्टम लागू

खाद वितरण के दौरान समिति ने नंबर के अनुसार लाइन व्यवस्था लागू की, जिसमें हर किसान को पर्ची के आधार पर क्रमवार खाद दी गई। इससे वितरण प्रक्रिया में अनुशासन और पारदर्शिता दोनों बढ़ी हैं। किसानों का कहना है कि पहले उन्हें घंटों तक कार्यालय के बाहर भीड़ में खड़ा रहना पड़ता था, फिर भी यह निश्चित नहीं होता था कि उन्हें खाद मिलेगी या नहीं। अब यह व्यवस्था बदल गई है।

गांव के किसान रामेश्वर, जोगेंद्र और रघुनंदन का कहना है कि पहले “कान फूंक व्यवस्था” चलती थी — यानी कुछ लोग सचिव या समिति के कर्मचारियों से अंदर जाकर बात करके अपनी मनमानी से खाद ले लेते थे, जबकि गरीब किसान लाइन में खड़े रह जाते थे। लेकिन अब सचिव गौतमी कुमारी ने इस प्रथा को सख्ती से बंद कर दिया है।

दलालों की दलाली पर पूरी तरह विराम

पहले खाद वितरण के दौरान कुछ दलाल सक्रिय रहते थे, जो किसानों से पैसे लेकर खाद दिलाने का वादा करते थे। लेकिन गौतमी कुमारी के कार्यभार संभालने के बाद यह सब खत्म हो गया है। उन्होंने साफ निर्देश दिया है कि खाद केवल अधिकृत किसान को ही, पंजीकरण और क्रम संख्या के अनुसार दी जाएगी। इससे दलालों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले कई बार कार्यालय के अंदर अनुशासनहीनता की स्थिति बनी रहती थी, लेकिन अब वहां सख्त नियम और व्यवस्था कायम हो गई है। किसान सुबह से लाइन में लगते हैं, और निर्धारित समय पर आसानी से खाद लेकर अपने घर लौट जाते हैं।

किसानों की खुशी और प्रशासन का विश्वास

सचिव गौतमी कुमारी की कार्यशैली से न सिर्फ किसान खुश हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन भी उनकी ईमानदारी और सक्रियता की सराहना कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कार्यालय में “पहले आओ, पहले पाओ” की नीति अपनाकर भ्रष्टाचार की जड़ पर चोट की है।

किसानों ने बताया कि इस बार किसी भी किसान को खाद के लिए किसी दलाल या सिफारिश का सहारा नहीं लेना पड़ा। सभी किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई गई, जिससे रबी फसल की तैयारी समय से हो सकी।

गांव में ईमानदारी की मिसाल बनी गौतमी कुमारी

गांव की महिलाएं और बुजुर्ग किसान भी गौतमी कुमारी की साफ-सुथरी छवि की तारीफ कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह उन्होंने ईमानदारी से काम किया है, वह आज के समय में एक मिसाल है।

कई किसानों ने कहा —

“पहले जब खाद आती थी, तो कुछ लोगों को बिना लाइन लगाए अंदर जाकर मिल जाती थी। अब सचिव जी ने सबको बराबर हक दिया है। कोई भेदभाव नहीं, कोई पक्षपात नहीं।”

भविष्य की उम्मीदें

गांव के लोग चाहते हैं कि ऐसी पारदर्शी व्यवस्था पूरे ब्लॉक में लागू हो ताकि हर किसान को समान रूप से लाभ मिले। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सभी सचिव इसी तरह काम करें, तो न केवल किसान खुशहाल होंगे बल्कि प्रशासन की साख भी बढ़ेगी।

गौतमी कुमारी का कहना है —

“हमारा प्रयास यही है कि हर किसान को उसकी मेहनत और हक का लाभ मिले। खाद वितरण में पारदर्शिता और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। कोई भी किसान परेशान न हो, यही हमारी प्राथमिकता है।”

गांव में उनकी कार्यशैली अब ईमानदारी और अनुशासन की पहचान बन चुकी है। किसान गर्व से कहते हैं —

“गौतमी कुमारी जैसी सचिव हों, तो गांव में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं रह जाएगी।”

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