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Lawyers Protest Hamirpur : हमीरपुर में अधिवक्ताओं का उग्र प्रदर्शन, हत्या मामले में NSA और मुआवजे की मांग

बुंदेलखंड क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जनपद में गुरुवार को अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा।

यह प्रदर्शन हाल ही में हुई एक वरिष्ठ अधिवक्ता की नृशंस हत्या के विरोध में किया गया, जिसने पूरे अधिवक्ता समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि अब भी कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेश भर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

हत्या की घटना से भड़का आक्रोश

अधिवक्ताओं के इस प्रदर्शन की मुख्य वजह रामपुर बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता फारुख अहमद खान की गोली मारकर की गई हत्या है। इस जघन्य हत्याकांड ने न केवल अधिवक्ता समाज बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि दिनदहाड़े एक वरिष्ठ वकील की हत्या यह साबित करती है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लगातार चेतावनी देने के बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

सड़क जाम कर जताया विरोध

गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में अधिवक्ता न्यायालय परिसर से निकलकर मुख्य सड़कों पर आ गए और जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए अधिवक्ताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

करीब कई घंटों तक चले इस प्रदर्शन के कारण शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात ठप हो गया। स्कूली वाहन, एंबुलेंस और आम नागरिक जाम में फंसे नजर आए। हालांकि अधिवक्ताओं ने आवश्यक सेवाओं को आंशिक रूप से निकालने की बात कही, लेकिन स्थिति काफी देर तक अव्यवस्थित बनी रही।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में हत्या के आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।

अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सामान्य हत्या नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को डराने और दबाने का प्रयास है। ऐसे मामलों में यदि कठोर कानूनों का इस्तेमाल नहीं किया गया, तो अपराधियों का मनोबल और बढ़ेगा।

डेढ़ करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग

ज्ञापन में मृतक अधिवक्ता के परिजनों के लिए डेढ़ करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है। अधिवक्ताओं ने कहा कि फारुख अहमद खान परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनकी हत्या से परिवार आर्थिक व मानसिक संकट में आ गया है।

इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की भी मांग की, ताकि परिवार को स्थायी सहारा मिल सके। उनका कहना है कि केवल सांत्वना से न्याय नहीं होगा, बल्कि पीड़ित परिवार को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए।

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को जल्द से जल्द लागू करने की पुरजोर मांग की। वक्ताओं ने कहा कि देश और प्रदेश में अधिवक्ताओं पर लगातार हमले बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कानून मौजूद नहीं है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि पुलिस, प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था के बीच कड़ी होने के बावजूद अधिवक्ता स्वयं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। ऐसे में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू होना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

बार एसोसिएशन का सख्त रुख

हमीरपुर बार एसोसिएशन संघ के महामंत्री अश्वनी प्रजापति ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक अधिवक्ता की हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे न्याय तंत्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो अधिवक्ता न्यायिक कार्य से पूर्ण रूप से विरत रहेंगे और आंदोलन को प्रदेश स्तर तक फैलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर बुंदेलखंड क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं से आम नागरिक भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि अपराधियों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई न होने के कारण ऐसे हत्याकांड बढ़ रहे हैं। यदि प्रशासन ने अब भी कठोर कदम नहीं उठाए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। अधिवक्ता समुदाय को उम्मीद है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।

फिलहाल हमीरपुर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस बल तैनात है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

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