ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाना क्षेत्र में स्थित सेक्टर पाई-1 के एक पेट्रोल पंप पर शनिवार दोपहर एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया, जिसने दर्जनों वाहन चालकों को परेशानी में डाल दिया। यहां पेट्रोल भरवाने आए लोगों को अंदाजा भी नहीं था कि उनकी गाड़ियों में पेट्रोल की जगह पानी जा रहा है। कुछ ही दूरी तय करने के बाद लगभग 20 वाहन अचानक खराब हो गए, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोग अपनी कारों और मोटरसाइकिलों में पेट्रोल भरवाकर सामान्य रूप से पेट्रोल पंप से निकले थे। लेकिन जैसे ही वे कुछ किलोमीटर आगे बढ़े, उनकी गाड़ियां झटके खाने लगीं और फिर अचानक बंद हो गईं। पहले तो लोगों को लगा कि यह सामान्य तकनीकी खराबी है, लेकिन जब एक के बाद एक कई वाहन इसी तरह बंद होने लगे, तो मामला गंभीर नजर आने लगा।
परेशान वाहन चालक तुरंत अपनी गाड़ियों को वापस पेट्रोल पंप की ओर ले गए और वहां मौजूद कर्मचारियों से शिकायत की। धीरे-धीरे वहां भीड़ इकट्ठा हो गई और लोगों ने पेट्रोल पंप प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जतानी शुरू कर दी। कुछ वाहन चालकों ने मौके पर ही मैकेनिक बुलाए, जिन्होंने जांच के बाद बताया कि गाड़ियों में डाला गया ईंधन दूषित है और उसमें पानी मिला हुआ है।
जैसे ही यह बात सामने आई कि पेट्रोल में पानी मिला हुआ है, ग्राहकों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने पेट्रोल पंप पर जमकर हंगामा किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। स्थिति बिगड़ती देख पेट्रोल पंप प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह लोगों को शांत कराया।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि पेट्रोल पंप के टैंक में तकनीकी खराबी के कारण पानी पहुंच गया था। पेट्रोल पंप के कर्मचारी संदीप शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक ट्रक की टक्कर से एक पाइप क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसी पाइप के जरिए बारिश का पानी टैंक में चला गया, जिससे पूरा पेट्रोल दूषित हो गया। अनजाने में यही मिश्रित ईंधन ग्राहकों के वाहनों में भर दिया गया।
इस घटना के कारण कुल 20 वाहन प्रभावित हुए, जिनमें 10 कारें और 10 मोटरसाइकिलें शामिल हैं। कई वाहनों को वहीं खड़े-खड़े मैकेनिक बुलाकर ठीक कराया गया, जबकि कुछ वाहनों को अधिक नुकसान होने के कारण पेट्रोल पंप पर ही छोड़ना पड़ा। वाहन चालकों ने इस लापरवाही के लिए पेट्रोल पंप प्रबंधन से मुआवजे की मांग की।
स्थिति को संभालते हुए पेट्रोल पंप के मैनेजर ने सभी प्रभावित ग्राहकों को नुकसान की भरपाई करने का आश्वासन दिया। बाद में कर्मचारियों ने बताया कि सभी प्रभावित वाहन चालकों को मुआवजा दे दिया गया है और उनके वाहनों की मरम्मत का खर्च भी उठाया गया है।
इस बीच, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पूर्ति विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और पूरे प्रकरण की जांच शुरू की। अधिकारियों ने पेट्रोल पंप के टैंक, पाइपलाइन और अन्य उपकरणों की जांच की और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
पेट्रोल पंप प्रबंधन के अनुसार, इस घटना में करीब 12,000 लीटर पेट्रोल बर्बाद हो गया है। दूषित ईंधन को टैंक से पूरी तरह निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और टैंक की सफाई कराई जा रही है। इसके साथ ही पूरे सिस्टम की तकनीकी जांच भी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की खामी को समय रहते दूर किया जा सके।
यह घटना न केवल पेट्रोल पंप प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि तकनीकी खराबियों को नजरअंदाज करना कितना महंगा साबित हो सकता है। यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत कर ली जाती, तो इतनी बड़ी समस्या से बचा जा सकता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती हैं। वाहन खराब होने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि पेट्रोल पंपों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग इस पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर ईंधन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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