
भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मंगलवार, 30 जून को अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने भारतीय सेना की कमान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को सौंप दी। अपने कार्यकाल के अंतिम दिन जनरल द्विवेदी ने India TV को दिए एक विशेष साक्षात्कार में भारतीय सेना की वर्तमान तैयारियों, भविष्य की युद्ध रणनीति, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति, ड्रोन युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य का युद्ध पारंपरिक हथियारों से कहीं आगे बढ़ चुका है। अब युद्ध के मैदान में तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सुरक्षित संचार और तेज निर्णय क्षमता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। भारतीय सेना इन्हीं बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए खुद को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बल के रूप में विकसित कर रही है।
LAC पर स्थिति स्थिर, सेना की प्राथमिकता शांति और मजबूत तैनाती
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की मौजूदा स्थिति पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर हालात फिलहाल स्थिर हैं। हाल के द्विपक्षीय समझौतों के बाद जमीन पर तनाव में कमी आई है और दोनों पक्ष एक-दूसरे की सुरक्षा चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सैन्य स्तर की बातचीत, हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की नियमित बैठकों की वजह से सीमा प्रबंधन बेहतर हुआ है और गलतफहमियों को रोकने में मदद मिल रही है।
सेना प्रमुख के अनुसार भारतीय सेना की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं हैं—
- LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना।
- स्थानीय स्तर के विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से करना।
- किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मजबूत और विश्वसनीय सैन्य तैनाती बनाए रखना।
ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया भारत की क्षमता और संयम
ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए जनरल द्विवेदी ने इसे भारत के संकल्प, क्षमता और रणनीतिक संयम का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ पूरी तैयारी और स्पष्ट उद्देश्य के साथ की गई एक सटीक सैन्य कार्रवाई थी।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में केवल अत्याधुनिक हथियार होना पर्याप्त नहीं है। सफलता के लिए भरोसेमंद खुफिया जानकारी, संयुक्त सैन्य योजना, सुरक्षित संचार प्रणाली, सटीक कार्रवाई और प्रभावी सूचना प्रबंधन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि दुनिया में चल रहे संघर्ष यह संकेत देते हैं कि भविष्य में युद्ध लंबे और कठिन भी हो सकते हैं, वहीं छोटे लेकिन अत्यधिक तकनीक आधारित संघर्षों की संभावना भी बनी रहेगी। दोनों परिस्थितियों में तेज निर्णय, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई ही जीत तय करेगी।
बदलते युद्ध के स्वरूप के अनुरूप खुद को बदल रही भारतीय सेना
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना अब केवल नए हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी पूरी कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव कर रही है। इसमें संगठनात्मक ढांचे, प्रशिक्षण प्रणाली, आधुनिक तकनीक, नेतृत्व क्षमता, संचालन पद्धति और मानव संसाधन विकास पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सेना सूचना, निगरानी, हथियार प्रणाली, सुरक्षित संचार और कमांडरों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दे रही है।
इसी रणनीति के तहत सेना में रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियां जैसी नई सैन्य संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इनका उद्देश्य सेना को अधिक तेज, अधिक सटीक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।
इसके अलावा बाज बटालियन की स्थापना भी भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। ये विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिकों और अधिकारियों की इकाइयां होंगी, जो दूर से संचालित विमान (UAV) और आधुनिक ड्रोन प्रणालियों के संचालन, निगरानी तथा प्रबंधन में विशेषज्ञ होंगी। इनकी मदद से युद्धक्षेत्र में लगातार निगरानी, बेहतर खुफिया जानकारी और तेज प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन बन चुके हैं सबसे बड़ा गेम चेंजर
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ड्रोन अब केवल निगरानी का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि आधुनिक सैन्य अभियानों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
उन्होंने बताया कि आज ड्रोन का उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने, लक्ष्य की पहचान करने, सटीक हमला करने, रसद सामग्री पहुंचाने, ऑपरेशन के बाद नुकसान का आकलन करने और सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना का लक्ष्य केवल बड़ी संख्या में ड्रोन खरीदना नहीं है, बल्कि एक मजबूत ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करना है। इसमें स्वदेशी निर्माण, प्रशिक्षित मानव संसाधन, रखरखाव, नियमित प्रशिक्षण, स्पष्ट संचालन प्रणाली, ड्रोन-रोधी तकनीक और सैन्य योजनाओं में ड्रोन का प्रभावी उपयोग शामिल है।
उनके अनुसार भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमता दोनों समान रूप से आवश्यक होंगी।
आत्मनिर्भरता ही भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार स्वदेशी रक्षा उत्पादन ही होगा। किसी भी संकट या युद्ध की स्थिति में देश को अपनी तकनीक, अपने उद्योग और अपनी उत्पादन क्षमता पर भरोसा करने में सक्षम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियां अब केवल विकल्प नहीं बल्कि सेना की मुख्य आवश्यकता बन चुकी हैं। इनका उपयोग निगरानी, संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सटीक प्रहार, सूचना प्रबंधन और सैन्य निर्णय प्रक्रिया में तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली प्रणालियों, आधुनिक गोला-बारूद, ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सुरक्षित संचार नेटवर्क और बेहतर बैटलफील्ड अवेयरनेस जैसे क्षेत्रों में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना का लक्ष्य “भारतीय चुनौतियों के लिए भारतीय समाधान” विकसित करना है। इसी उद्देश्य से डीआरडीओ, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योग, MSME, स्टार्ट-अप और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के परीक्षण, विकास और शीघ्र सैन्य उपयोग पर तेजी से काम किया जा रहा है।
निष्कर्ष
सेना प्रमुख के रूप में अपने अंतिम संबोधन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धों की चुनौतियों के लिए तेजी से खुद को बदल रही है। तकनीक, ड्रोन शक्ति, नेटवर्क आधारित युद्ध, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और संयुक्त सैन्य संचालन आने वाले समय में भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत होंगे। उनके अनुसार भविष्य का युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सूचना, नवाचार, तकनीक और आत्मनिर्भरता के बल पर जीता जाएगा।




