बुलंदशहर से बड़ी खबर — मां-बेटी सामूहिक दुष्कर्म केस में आया ऐतिहासिक फैसला, सभी 5 दोषियों को उम्रकैद

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। वर्ष 2016 में एनएच-91 (राष्ट्रीय राजमार्ग) पर हुए बहुचर्चित मां-बेटी सामूहिक दुष्कर्म कांड में अदालत ने आज ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस जघन्य अपराध में शामिल सभी पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
इसके साथ ही अदालत ने प्रत्येक दोषी पर ₹1 लाख 81 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
यह महत्वपूर्ण फैसला अपर जनपद सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) ओमप्रकाश तृतीय की अदालत ने सुनाया।
अदालत ने माना कि यह घटना न केवल इंसानियत के लिए शर्मनाक थी बल्कि कानून और समाज की मूल आत्मा पर भी हमला था।
न्यायालय ने कहा कि —
“ऐसे अपराध समाज के लिए नासूर हैं, और इनके लिए सिर्फ कठोर दंड ही न्याय का संतुलन बना सकता है।”
29 जुलाई 2016 की उस भयावह रात को दरिंदों ने एनएच-91 पर चलती कार को रोककर एक परिवार को बंधक बना लिया था। इसके बाद मां और उसकी नाबालिग बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी अमानवीय घटना को अंजाम दिया गया था।
घटना के समय पूरा परिवार दिल्ली से शाहजहांपुर की ओर जा रहा था। रास्ते में दरिंदों ने उनकी गाड़ी को रोककर घंटों तक आतंक मचाया था।
इस मामले में शुरूआत में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान मुख्य आरोपी सलीम बावरिया की मौत हो गई थी।
वहीं, उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने मुठभेड़ में दो अन्य आरोपियों को ढेर कर दिया था।
सीबीआई जांच के दौरान तीन आरोपियों को निर्दोष मानते हुए उनके नाम तफ्तीश से अलग कर दिए गए।
लंबी सुनवाई और गवाहों के बयानों के बाद अंततः अदालत ने 5 आरोपियों को दोषी करार दिया —
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जुबैर (निवासी कन्नौज)
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साजिद (निवासी कन्नौज)
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धर्मवीर (निवासी फर्रुखाबाद)
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नरेश (निवासी फर्रुखाबाद)
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सुनील (निवासी फर्रुखाबाद)
इन सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
9 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आज जब फैसला आया, तो पीड़ित परिवार की आंखों से आंसू छलक पड़े।
परिजनों ने कहा कि —
“हमें अब यकीन हुआ कि कानून पर भरोसा करने से न्याय मिलता है, भले देर से ही सही।”
एडीजीसी पॉक्सो वरुण कुमार कौशिक ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा —
“यह फैसला समाज के लिए एक संदेश है कि चाहे अपराधी कितने भी ताकतवर क्यों न हों, न्याय व्यवस्था उन्हें सजा दिलाने में सक्षम है। यह मां-बेटी के साथ हुए अत्याचार के खिलाफ न्याय की ऐतिहासिक जीत है।”
2016 में यह मामला उस समय देशभर में सुर्खियों में आया था।
एनएच-91 पर यात्रियों को रोककर गैंगरेप जैसी घटना ने देश की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
सरकार ने तत्काल प्रभाव से मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी, और दोषियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया था।
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