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Power Shortage : बलरामपुर में 26 साल से बंद 33/11 केवी उपकेन्द्र को चालू कराने की मांग तेज

बलरामपुर जिले के शिवपुरा बाजार और आसपास के गांवों में वर्षों से जारी बिजली संकट ने अब गंभीर रूप ले लिया है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने 26 वर्षों से बंद पड़े 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र शिवपुरा को चालू कराने की मांग तेज कर दी है।

इस संबंध में पूर्व सांसद प्रत्याशी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता युगल किशोर शुक्ल ने ऊर्जा राज्य मंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला अधिकारी कार्यालय में उपस्थित प्रतिनिधि ज्योति राय को सौंपा।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 1999 में 33/11 केवी उपकेन्द्र शिवपुरा का शिलान्यास बड़े उत्साह के साथ किया गया था। उद्देश्य था — क्षेत्र के किसानों, दुकानदारों और घरेलू उपभोक्ताओं को निरंतर और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना।

लेकिन दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह परियोजना आज तक चालू नहीं हो सकी। इस कारण शिवपुरा, हरिहरपुर, औरेडी, रमवापुर, खेसरहवा और आसपास के गांवों को 15 किलोमीटर दूर स्थित महराजगंज उपकेन्द्र से बिजली आपूर्ति मिल रही है, जिससे न केवल लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है बल्कि बार-बार बिजली कटौती भी होती है।

गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही यह समस्या और विकराल रूप ले लेती है। क्षेत्र में पंखे, कूलर और मोटर तक सही ढंग से नहीं चल पाते। बार-बार ट्रांसफार्मर जलने, फ्यूज उड़ने और ओवरलोडिंग जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं।

स्थानीय दुकानदारों और किसानों का कहना है कि कमजोर बिजली आपूर्ति के कारण व्यापार, सिंचाई और घरेलू कार्यों पर गंभीर असर पड़ रहा है।

एक स्थानीय निवासी ने बताया —

“गांव में बिजली आती भी है तो वोल्टेज इतना कम रहता है कि पंखे तक नहीं चल पाते। फसल सीजन में ट्यूबवेल चलाना भी मुश्किल हो जाता है।”

पूर्व सांसद प्रत्याशी युगल किशोर शुक्ल ने ज्ञापन के माध्यम से ऊर्जा मंत्री से मांग की कि शिवपुरा उपकेन्द्र को तत्काल चालू किया जाए, ताकि क्षेत्र की बिजली व्यवस्था सुधारी जा सके। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उपकेन्द्र का निर्माण पूर्ण हो चुका है, लेकिन तकनीकी परीक्षण और लाइन कनेक्शन के अभाव में इसे चालू नहीं किया जा रहा। इससे सरकारी संसाधन भी वर्षों से बेकार पड़े हैं।

क्षेत्र के ग्रामीणों का मानना है कि उपकेन्द्र चालू होने से महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। न केवल घरेलू उपभोक्ताओं को स्थायी बिजली मिलेगी, बल्कि किसान सिंचाई के लिए आसानी से पंप और मोटर चला सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा।

महिलाओं ने भी शिकायत की कि रात के समय बिजली न रहने से सुरक्षा की दिक्कतें बढ़ जाती हैं, और बच्चे परीक्षा के दिनों में अंधेरे में पढ़ाई करने को मजबूर होते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस उपकेन्द्र की फाइल बार-बार लखनऊ भेजी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब भवन और उपकरण तैयार हैं तो आखिर उपकेन्द्र को चालू करने में देरी क्यों?

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद ऊर्जा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

शिवपुरा उपकेन्द्र का न चल पाना सिर्फ बिजली की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास की भी बड़ी रुकावट बन चुका है। उद्योग, शिक्षा संस्थान और बाजार सभी प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बलरामपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में बिजली व्यवस्था मजबूत किए बिना आर्थिक विकास की रफ्तार पकड़ना मुश्किल है।

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि ऊर्जा विभाग अब इस मामले में गंभीरता दिखाएगा। यदि उपकेन्द्र चालू हो गया तो क्षेत्र की बिजली समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

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