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Auraiya Fog Railway Delay – औरैया में भीषण कोहरे का कहर, फफूंद स्टेशन पर घंटों फंसे यात्री

बड़ी खबर औरैया से: भयंकर कोहरे की चपेट में जिला, फफूंद स्टेशन पर घंटों फंसे यात्री

रिपोर्ट : विकास अवस्थी, जिला संवाददाता

औरैया जनपद इस समय भीषण कोहरे की चपेट में है, जिसका सीधा असर रेल यातायात पर देखने को मिल रहा है। जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन दिबियापुर स्थित फफूंद जंक्शन पर गाड़ियों की भारी देरी के चलते यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोहरे के कारण अधिकतर ट्रेनें 4 से 8 घंटे तक देरी से चल रही हैं, जिससे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ और असुविधा बढ़ गई है।

फफूंद रेलवे स्टेशन को रेलवे द्वारा आदर्श ‘ए’ ग्रेड स्टेशन की श्रेणी में रखा गया है और इसकी वार्षिक आय 30 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। इसके बावजूद इटावा–कानपुर रेलखंड के बीच सर्वाधिक राजस्व देने वाले इस स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव बेहद सीमित है। यात्रियों का कहना है कि यदि अतिरिक्त गाड़ियों का ठहराव दिया जाए तो सैकड़ों यात्रियों को राहत मिल सकती है।

कोहरे के कारण जब ट्रेनें घंटों लेट हो रही हैं, तब स्टेशन पर ठहराव न मिलने से यात्री रात भर प्लेटफॉर्म पर भटकने को मजबूर हैं। सर्द रातों में यात्रियों को खुले आसमान के नीचे जागकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। कई यात्री अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ ठंड में परेशान नजर आए।

यात्रियों ने बताया कि संगम एक्सप्रेस, ऊंचाहार एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस, कालका एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस और आगरा सुपरफास्ट सहित कई प्रमुख ट्रेनें कई-कई घंटे की देरी से फफूंद स्टेशन से गुजरीं। देरी की सही जानकारी समय पर न मिलने से यात्रियों में आक्रोश भी देखने को मिला।

कड़ाके की ठंड से बचने के लिए यात्रियों ने नगर पंचायत द्वारा जलाए गए अलाव का सहारा लिया और कई लोगों ने प्लेटफॉर्म पर ही रात गुजार दी। यात्रियों का कहना है कि यदि स्टेशन पर अधिक ठहराव, पर्याप्त प्रतीक्षालय, कंबल और हीटर जैसी व्यवस्थाएं होतीं तो इतनी परेशानी न झेलनी पड़ती।

यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि कोहरे की स्थिति को देखते हुए अस्थायी रूप से अतिरिक्त गाड़ियों का ठहराव फफूंद स्टेशन पर दिया जाए, ताकि लंबी दूरी के यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं को राहत मिल सके। साथ ही ट्रेनों की स्थिति की सटीक जानकारी भी समय पर उपलब्ध कराई जाए।

फिलहाल कोहरा छंटने तक हालात सुधरने की संभावना कम दिखाई दे रही है। ऐसे में रेलवे प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर यात्रियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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