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Kalpi Grain Scam : कालपी गल्ला मंडी में ज्वार-बाजरा तौल घोटाला, व्यापारी को मिली सुविधा

जालौन जिले की कालपी गल्ला मंडी से एक चौंकाने वाली और विवादित खबर सामने आई है, जिसने किसानों और आम जनता में गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है। मंडी में ज्वार और बाजरा की तौल की प्रक्रिया सरकारी नियमों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक किसान और व्यापारी को लाइन में खड़ा होकर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।

लेकिन स्थानीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक गल्ला व्यापारी ने निजी दुकान से लदे ट्रैक्टर को सीधे सरकारी तौल करवाया, और प्रक्रिया को नियमों की अवहेलना करते हुए पूरा किया गया।

मीडिया जब मौके पर पहुंचा, तो उसने देखा कि सरकारी तौल में हो रही अनियमितता को कैमरे में कैद कर लिया।
तौल करवा रही महिला कर्मचारी को जैसे ही मीडिया कर्मियों का पता चला, उसने तुरंत तौल प्रक्रिया रोक दी और ट्रैक्टर को मौके से हटा दिया।

किसानों का कहना है कि उन्हें महीनों तक सरकारी तौल कराने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है, जबकि कुछ व्यापारी नियम तोड़कर पहले सुविधा प्राप्त कर लेते हैं।
सोशल मीडिया पर पहले भी इस तरह की अवैध तौल की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

किसानों का आरोप है कि यह अनियमितता लंबे समय से चल रही है।
किसान प्रतिनिधि रमेश पाल ने कहा:

“यह पूरी तरह से अन्याय है। जो नियम सबके लिए हैं, उन्हें तोड़कर कुछ विशेष लोगों को लाभ पहुंचाना किसानों के साथ धोखा है। प्रशासन को अब कार्रवाई करनी चाहिए।”

किसानों का कहना है कि यदि यह घोटाला पहले से चल रहा था, तो यह सिस्टमिक भ्रष्टाचार का संकेत है और मंडी में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।

मंडी प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
अब यह सवाल उठता है कि क्या व्यापारी और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ जांच होगी, या यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो छोटे व्यापारी और किसान हतोत्साहित होंगे और मंडी की सकारात्मक व्यवस्था में बाधा आएगी।

मीडिया रिपोर्ट और सूत्रों के अनुसार:

  • ट्रैक्टर में निजी दुकान से लदा ज्वार-बाजरा था

  • कोई रजिस्ट्रेशन या लाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई

  • नियमों को दरकिनार कर सरकारी तौल की सुविधा दी गई

किसानों और आम जनता का कहना है कि यह नियमों के खिलाफ गंभीर घोटाला है।

मंडी में मौजूद स्थानीय लोग और व्यापारी इस घटना पर नाराज हैं।
किसान सुरेश यादव ने कहा:

“हमको नियमों का पालन करना पड़ता है। हर बार लाइन में खड़े होकर तौल करवानी पड़ती है, लेकिन कुछ लोग नियम तोड़कर पहले लाभ ले लेते हैं। यह अनुचित है।”

स्थानीय व्यापारियों ने भी कहा कि यदि प्रशासन समय रहते सख्त निगरानी और कार्रवाई नहीं करता, तो इस तरह की अनियमितताएं बढ़ती रहेंगी।

प्रशासन ने अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की है।
हालांकि, मंडी अधिकारियों और SDM के स्तर पर यह मामला निगरानी में लिया गया है।
अब देखना बाकी है कि क्या व्यापारी और कर्मचारी के खिलाफ जांच और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी या यह मामला प्रशासनिक फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और सख्त नियम लागू करना जरूरी है।

  • कालपी गल्ला मंडी में ज्वार-बाजरा तौल प्रक्रिया में नियमों की अवहेलना

  • निजी दुकान से लदे ट्रैक्टर को सीधे सरकारी तौल करवा दिया गया

  • महिला कर्मचारी ने मीडिया आने पर तौल रुकवा दी

  • किसानों का आरोप कि नियम तोड़कर कुछ को विशेष सुविधा दी जा रही है

  • प्रशासन पर सवाल, अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं

कालपी गल्ला मंडी का यह मामला यह दिखाता है कि सरकारी तौल व्यवस्था में पारदर्शिता और कड़ाई की कितनी आवश्यकता है।
किसानों का भरोसा तब तक कायम नहीं रहेगा जब तक अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। यदि प्रशासन समय रहते कदम उठाता है, तो मंडी में न्यायसंगत और समान अवसर आधारित तौल व्यवस्थ

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