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Plantation Negligence -निस्वारा नर्सरी में पौधरोपण में लापरवाही, बिना छनी मिट्टी से पौध तैयार

 निस्वारा नर्सरी में पौधरोपण में लापरवाही का आरोप

पनवाड़ी (महोबा) से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां विकास खंड पनवाड़ी अंतर्गत निस्वारा नर्सरी में पौध तैयार करने के कार्य में भारी लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। शासन द्वारा पौधरोपण अभियान को सफल बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन नर्सरी स्तर पर ही इन निर्देशों की अनदेखी होने से पूरे अभियान की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार निस्वारा नर्सरी में पौधों की रोपाई का कार्य मजदूरों से कराया जा रहा है, लेकिन नियमों के अनुसार मिट्टी को छानकर और निर्धारित मात्रा में खाद मिलाकर पॉलिथीन में भरने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। नर्सरी में इस्तेमाल की जा रही मिट्टी बिना छनी हुई है, जिसमें कंकड़, ढेले और खरपतवार के अंश साफ नजर आ रहे हैं। वहीं, पौधों के लिए जरूरी खाद की मात्रा भी मानक से काफी कम बताई जा रही है।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि नर्सरी में लगभग दो लाख पौधों की रोपाई की जानी है। इतनी बड़ी संख्या में पौध तैयार किए जाने के बावजूद गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। नर्सरी में कार्यरत कुछ कर्मचारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि जल्दबाजी और निगरानी के अभाव में पौधों की तैयारी की जा रही है। यदि इसी तरह लापरवाही जारी रही तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में पौधे खराब हो सकते हैं।

ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि हर वर्ष पौधरोपण के नाम पर सरकार लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन यदि नर्सरी स्तर पर ही मानकों की अनदेखी होगी तो पौधे खेतों, सड़कों और सरकारी भूमि पर रोपित होने के बाद लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाएंगे। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि हरियाली बढ़ाने का उद्देश्य भी अधूरा रह जाएगा।

मामले में जब पनवाड़ी रेंजर से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया। रेंजर का पक्ष सामने न आने से पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि निस्वारा नर्सरी में चल रहे पौधरोपण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में मानकों की अनदेखी और लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शासन के निर्देशों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार हो सकें और पौधरोपण अभियान को सफल बनाया जा सके।

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