सिद्धार्थनगर से बड़ी चिंता की खबर सामने आई है। यहाँ के विधायक और माननीय अधिकारी अब न केवल पुलिस और प्रशासन पर भरोसा खोते नजर आ रहे हैं, बल्कि सीधे तौर पर योगी सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं।

लोकसभा और विधानसभा के कई माननीयों ने हाल ही में विधानसभा में इस बात की चिंता जताई है कि उनके जीवन को वास्तविक खतरा है। खासकर, अपना दल के विधायक विनय वर्मा ने सदन में अपने भाषण में साफ किया कि उन्हें और उनके सहयोगियों को जानलेवा हमले की आशंका है। उन्होंने विशेष रूप से नेपाली नागरिकों से खतरे की बात कही और मांग की कि पुलिस और प्रशासन तुरंत उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
विधायक विनय वर्मा ने विधानसभा अध्यक्ष से अपील करते हुए कहा कि उनके और उनके क्षेत्रवासियों की सुरक्षा पर तत्काल ध्यान दिया जाए और मामले की पूरी जांच कराई जाए। उन्होंने सदन में यह भी कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो उनकी और उनके सहयोगियों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
इस दौरान सदन की कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें विधायक की गंभीर चिंता और सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की मांग साफ दिखाई दे रही है। वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय जनता में भी सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा गर्म हो गई है।
पूर्व विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह के नाम भी धमकियों और हमले के प्रयास की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इससे सिद्धार्थनगर जिले में बढ़ते अपराध का ग्राफ भी स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है। लोग कह रहे हैं कि अब सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि माननीय भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन और पुलिस प्रशासनिक ढांचा सही ढंग से कार्यान्वित नहीं होगा, तो यह स्थिति राजनीतिक अस्थिरता और कानून व्यवस्था की दृष्टि से गंभीर परिणाम दे सकती है।
सिद्धार्थनगर में बढ़ता अपराध और विधायकों पर लगातार धमकियों के बीच, यह सवाल उठता है कि क्या योगी सरकार अपने सुशासन के दावों को जमीन पर उतारने में सक्षम है या नहीं।
इस मामले की जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब प्रदेश सरकार की ओर से तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। जनता और माननीय दोनों ही प्रशासन की सक्रियता के लिए आशा लगाए बैठे हैं।
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