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करगांव में नमामी गंगे सड़क अधूरी, ठेकेदार की लापरवाही से गांव की जिंदगी प्रभावित

हमीरपुर, करगांव। हमीरपुर जनपद के ग्राम करगांव की सड़कें नमामी गंगे योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन के बाद पूरी तरह से जर्जर और दलदल जैसी हो गई हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार लोकेन्द्र सिंह ने सड़क का काम अधूरा छोड़ दिया और महीनों से मरम्मत की तरफ ध्यान तक नहीं दिया। इससे पूरे गांव की दैनिक जीवनशैली और सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

40 साल पुरानी परंपरा भी रुक गई

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की हालत इतनी भयावह हो गई है कि बीते 40 वर्षों से नियमित निकल रही प्रभात फेरी भी कीचड़ में फंसकर इस बार आयोजित नहीं हो सकी। यह पहली बार है जब करगांव में इस परंपरा पर ब्रेक लगा है। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चे, खेतों की ओर जाने वाले किसान, और रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल अन्य लोग कीचड़ और पानी से जूझते हुए गुजरने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का गुस्सा और प्रशासन से मांग

गांव के लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और सड़क की मरम्मत की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि काम जल्द शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन पर उतर सकते हैं।

ग्रामीण बाइट्स:

  • छत्रपाल: “सड़क की हालत इतनी खराब है कि बच्चों और किसानों को रोज़ की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।”

  • कल्लू: “40 साल पुरानी प्रभात फेरी इस साल नहीं निकली, यह हमारी संस्कृति के लिए बड़ा झटका है।”

  • काशी कुशवाहा: “ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया, अब हमारी जिंदगी अंधेरे और कीचड़ में फंस गई।”

  • दुर्गाप्रसाद: “हम प्रशासन से मांग करते हैं कि जल्द कार्रवाई हो।”

  • शुभाष कुशवाहा: “सड़क की हालत देखकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।”

  • बच्चालाल कुशवाहा: “यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो हम आंदोलन करेंगे।”

अपर जिलाधिकारी का बयान

सुरेश कुमार, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे, हमीरपुर, ने कहा कि “सड़क की मरम्मत और अधूरे काम को जल्द पूरा कराया जाएगा। ठेकेदार की लापरवाही की जांच की जा रही है और जल्द ही काम शुरू होगा।”

स्थानीय जीवन पर प्रभाव

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की बुरी हालत के कारण खेतों में जाना, बच्चों का स्कूल जाना और दैनिक कार्य करना कठिन हो गया है। साथ ही बारिश के मौसम में यह और भी गंभीर समस्या बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर हुई यह लापरवाही उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और परंपराओं पर गहरा असर डाल रही है।

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