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Kannauj Annual Jalsa: उलेमाओं ने दिया शिक्षा और सही आचरण से समाज उत्थान का संदेश

कन्नौज जनपद में धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बन चुका मदरसा दारुल उलूम गौसिया का सालाना जलसा इस वर्ष भी श्रद्धा और अनुशासन के माहौल में आयोजित किया गया।

छिबरामऊ कस्बे के सैयदबाड़ा मोहल्ले स्थित इस मदरसे में हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने पहुंचकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

इस साल आयोजित हुआ यह जलसा मदरसे का 26वां वार्षिक आयोजन था, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। मदरसे के परिसर को खूबसूरती से सजाया गया था और सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। शाम तक मैदान अकीदतमंदों से खचाखच भर गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुरआन की तिलावत से हुआ, जिसके बाद विभिन्न स्थानों से आए उलेमाओं ने लोगों को संबोधित किया। जलसे में मुख्य रूप से बांदा जिले की आलिया मसूदिया खानकाह से आए प्रसिद्ध मौलाना सय्यद आमिर मियां मसूदी और राजस्थान से आए मुफ्ती समी उल्लाह ने समाज सुधार और शिक्षा के महत्व पर विस्तृत रूप से विचार रखे।

मौलाना सय्यद आमिर मियां मसूदी ने अपने बयान में कहा कि –

“शिक्षा ही वह रास्ता है जिससे मुस्लिम समाज का वास्तविक उत्थान संभव है। हमें अपने बच्चों को आधुनिक और धार्मिक दोनों प्रकार की शिक्षा देनी चाहिए, ताकि वे समाज और देश के विकास में अहम भूमिका निभा सकें।”

उन्होंने आगे कहा कि जुआ, शराब और असंयमित जीवनशैली इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। ऐसे कर्म समाज को कमजोर बनाते हैं, इसलिए हर व्यक्ति को अपने आचरण पर नियंत्रण रखना चाहिए और इस्लामी मूल्यों को अपनाना चाहिए।

वहीं, राजस्थान से आए मुफ्ती समी उल्लाह ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में नौजवानों के पास असीम ऊर्जा और क्षमता है, लेकिन उन्हें इसे सही दिशा में लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा —

“नौजवान हमारे समाज की रीढ़ हैं। अगर वे शिक्षा, अनुशासन और नैतिकता का पालन करें, तो समाज और मुल्क दोनों तरक्की करेंगे। सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय युवाओं को अपनी तालीम और अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।”

कार्यक्रम में विभिन्न मदरसों के छात्र-छात्राओं ने नात, तकरीर और तालीमी प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा। आयोजन के अंत में मदरसे के जिम्मेदारों ने मेहमान उलेमाओं का स्वागत किया और सामूहिक दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

इस मौके पर मदरसे के प्रबंधक ने बताया कि यह वार्षिक जलसा न केवल धार्मिक शिक्षा का माध्यम है, बल्कि समाज में जागरूकता और एकता का संदेश देने का भी उद्देश्य रखता है।

मौलाना सय्यद आमिर मियां मसूदी (आलिया मसूदिया खानकाह, बांदा):

“शिक्षा से ही समाज आगे बढ़ता है। हमें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार और ज्ञान देना चाहिए। जुआ, शराब और बुरे कर्मों से बचना जरूरी है ताकि हमारी अगली पीढ़ी एक नेक राह पर चल सके।”

  • छिबरामऊ के सैयदबाड़ा मोहल्ले में मदरसा दारुल उलूम गौसिया का 26वां सालाना जलसा

  • हजारों की संख्या में अकीदतमंद हुए शामिल

  • बांदा और राजस्थान से आए उलेमाओं ने दिया शिक्षा और सही आचरण का संदेश

  • मौलाना सय्यद आमिर मियां मसूदी और मुफ्ती समी उल्लाह ने युवाओं को तालीम की ओर अग्रसर रहने का आह्वान किया

  • कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ

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