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SC सख्त: आवारा कुत्तों पर ज्यादातर राज्यों ने नहीं दिए हलफनामे, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिवों को तलब किया

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2025:
देशभर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर चल रही याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि केंद्र और राज्यों को पहले ही नोटिस भेजे जाने के बावजूद अधिकतर राज्य सरकारों ने अब तक इस मुद्दे पर अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया है। इस लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।


क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला आवारा कुत्तों द्वारा लोगों पर लगातार हो रहे हमलों और उनके नियंत्रण से जुड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आवारा कुत्तों के हमलों से बच्चों और बुजुर्गों की जान तक चली गई। इसको देखते हुए शीर्ष अदालत ने स्वयं संज्ञान लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे अपनी-अपनी स्थिति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें और बताएं कि उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।


सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनीषा सिंह की बेंच ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि इतने गंभीर सार्वजनिक मुद्दे पर अधिकांश राज्यों ने अभी तक अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा — “जनहित से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर सरकारों की उदासीनता अस्वीकार्य है। यदि समय पर रिपोर्ट नहीं दी जाती है, तो हम अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से बुलाने के लिए बाध्य होंगे।”


3 नवंबर को अगली सुनवाई

अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आने वाली 3 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो राज्य इस तारीख से पहले हलफनामा दाखिल नहीं करेंगे, उन्हें अदालत में जवाब देना होगा कि आदेशों की अवहेलना क्यों की गई।


पृष्ठभूमि: देशभर में बढ़ रही घटनाएं

देश के कई शहरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। बीते महीनों में दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, कोच्चि और हैदराबाद जैसे शहरों से कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। कई नगर निगम इस समस्या के समाधान के लिए नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहे हैं, लेकिन अदालत के अनुसार यह प्रयास अभी भी पर्याप्त नहीं हैं।


कोर्ट ने क्या कहा सरकारों से

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से यह भी कहा कि वे बताएं कि अब तक कितने आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई है, कितनी शिकायतें दर्ज हुई हैं और इस दिशा में क्या योजनाएं लागू हैं। साथ ही, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सरकारें नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ पशु कल्याण के संतुलन पर भी काम करें।


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकारें इस दिशा में गंभीर कदम उठाएंगी। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उससे होने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ठोस और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नीति की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। अब सबकी निगाहें 3 नवंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जब देशभर के मुख्य सचिवों को कोर्ट के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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