
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों से त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे कारोबारियों के बनाए उत्पाद खरीदने की अपील की। रविवार, 25 अक्टूबर को प्रसारित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान, खादी की बढ़ती लोकप्रियता और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिल रही पहचान का जिक्र किया। यह एपिसोड कार्यक्रम के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी खास रहा।
त्योहारों की खरीदारी में स्वदेशी को दें प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने कहा कि त्योहारों के समय लोग अपने परिवार और प्रियजनों के लिए कई तरह की खरीदारी करते हैं। ऐसे में स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए सामान को प्राथमिकता देने से उनकी मेहनत को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे छोटे कारोबारियों की आमदनी बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से भारतीय वस्तुओं के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।
खादी की बिक्री एक दिन में 28 करोड़ रुपये के पार
प्रधानमंत्री ने खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गांधी जयंती के अवसर पर खादी ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री एक दिन में 28 करोड़ रुपये से अधिक रही। पिछले वर्ष की तुलना में इसमें करीब 1.5 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।
यह उपलब्धि खादी से जुड़े कारीगरों, बुनकरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खादी उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और पारंपरिक हुनर को जीवित रखने में भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि त्योहारों पर खादी और हस्तशिल्प जैसे स्थानीय उत्पादों को भी अपनी खरीदारी में शामिल करें।
बिहार का मखाना और कर्नाटक की अरहर दाल विदेशों तक पहुंची
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक पहुंच के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव में निर्यात की जा रही है।
इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने बताया कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलने से किसानों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गुणवत्ता, उचित पैकेजिंग और बाजार की मांग को समझकर छोटे उत्पादक भी अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़ सकते हैं।
आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग को जापान में सम्मान
प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र की आदिवासी समुदायों से जुड़ी पहल ‘शबरी नेचुरल्स’ का भी उल्लेख किया। इसके तहत शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को बाजार में पहुंचाया जा रहा है। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और संस्कृति को दर्शाया गया है, जिसे जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है।
उन्होंने इस उदाहरण से समझाया कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी पैकेजिंग भी महत्वपूर्ण होती है। आकर्षक और पहचान दर्शाने वाली पैकेजिंग स्थानीय उत्पादों को बाजार में अलग पहचान दिला सकती है।
प्राकृतिक खेती, नदियों के संरक्षण और मोटे अनाज पर भी चर्चा
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा देने वाली ‘नव-त्रिंजन’ पहल का जिक्र किया। उन्होंने उत्तराखंड में हेंवल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के प्रयासों की भी सराहना की।
इसके अलावा, मेघालय और नागालैंड में मोटे अनाज की खेती तथा उससे तैयार होने वाले खाद्य उत्पादों को प्रोत्साहित करने वाले प्रयासों का उल्लेख किया। इन उदाहरणों से खेती में पारंपरिक ज्ञान, नए प्रयोग और स्थानीय उद्यमिता के महत्व को रेखांकित किया गया।

12 साल पूरे कर चुका है ‘मन की बात’
प्रधानमंत्री का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ 3 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ था। इसके 139वें एपिसोड में उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे लोगों, समुदायों और उद्यमियों के प्रयासों को सामने रखा।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था कि स्थानीय उत्पादों को खरीदना केवल खरीदारी का फैसला नहीं, बल्कि कारीगरों, किसानों और छोटे कारोबारियों के काम को समर्थन देने का तरीका भी है। त्योहारों के इस मौसम में स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देकर लोग स्थानीय अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान दे सकते हैं।




