
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 536.30 अंक टूटकर 72,583.86 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 200.10 अंक गिरकर 22,402.80 के स्तर पर आ गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता ने बाजार की धारणा पर दबाव डाला।
सेंसेक्स और निफ्टी में क्यों आई गिरावट?
सोमवार को बाजार में बिकवाली के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारक रहे। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा रहने से आयात बिल बढ़ने, महंगाई पर दबाव पड़ने और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर भी निवेशकों की नजर है। ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक के संकेत डॉलर, बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। इसी अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम लेने से बचते दिखाई दिए।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, अडानी पोर्ट्स और एक्सिस बैंक के शेयर बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 114.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे परिवहन, उत्पादन और आयात की लागत बढ़ सकती है। इसका असर कंपनियों के मुनाफे और महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी निवेशकों के फैसलों पर असर डाल रही है। इसके साथ ही, एशिया के कई प्रमुख बाजारों में कमजोरी और शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में आई गिरावट ने भारतीय बाजार के लिए शुरुआती माहौल को कमजोर बनाया।
निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर
इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक बाजार के लिए अहम रहने वाली है। निवेशक यह जानना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों और महंगाई को लेकर आगे क्या रुख अपनाएगा। यदि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो उभरते बाजारों में विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा, भारतीय कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे भी शेयरों की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कंपनियों की कमाई, लागत और भविष्य के कारोबारी अनुमान पर निवेशकों की नजर रहेगी।

निवेशक क्या करें?
बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान जल्दबाजी में खरीदारी या बिकवाली करने से बचना जरूरी है। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय नतीजों, अपने निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। केवल बाजार की एक दिन की गिरावट देखकर लंबी अवधि के निवेश को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
निष्कर्ष: 26 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी पर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सतर्कता का दबाव रहा। हालांकि, शेयर बाजार के आंकड़े पूरे कारोबारी सत्र में बदल सकते हैं। इसलिए निवेशकों को अंतिम बंद स्तर और दिनभर के कारोबार की दिशा पर भी नजर रखनी चाहिए।




