
तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर दोबारा हमला किया जाता है, तो तेहरान फारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने पर विचार कर सकता है। इन केबलों के जरिए दुनिया के विभिन्न देशों के बीच इंटरनेट और डिजिटल संचार का बड़ा हिस्सा संचालित होता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ का हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में इस क्षेत्र में केबलों को नुकसान पहुंचने का असर गंभीर तो हो सकता है, लेकिन पूरी दुनिया का इंटरनेट ठप होने की आशंका को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना अहम निशाना?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। इसके अलावा, समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलें भी इस क्षेत्र को वैश्विक डिजिटल नेटवर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती हैं।
इन केबलों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा, डिजिटल सेवाओं और दूरसंचार से जुड़ा ट्रैफिक एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। ऐसे में यदि किसी महत्वपूर्ण केबल को नुकसान पहुंचता है, तो संबंधित क्षेत्र में इंटरनेट की गति प्रभावित हो सकती है। कुछ सेवाओं में रुकावट आ सकती है और डेटा ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों से भेजने की जरूरत पड़ सकती है।
ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो कोई रेड लाइन नहीं
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर दो ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने समुद्र के नीचे मौजूद संचार केबलों को संभावित निशाना बनाए जाने की बात कही। हालांकि, उन्होंने किसी निश्चित स्थान या हमले की कार्ययोजना का खुलासा नहीं किया।
एक अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान पर हमला होता है, तो फिर कोई रेड लाइन नहीं बचेगी। उनके मुताबिक, संभावित जवाबी कार्रवाई में समुद्र के नीचे बिछी केबलों के साथ सैन्य ठिकानों और अन्य संवेदनशील स्थानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे आग से नहीं खेलना चाहिए। इन बयानों से संकेत मिलता है कि ईरान संभावित सैन्य संघर्ष की स्थिति में केवल पारंपरिक सैन्य ठिकानों तक सीमित प्रतिक्रिया देने के बजाय क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी दबाव बनाने की रणनीति पर विचार कर सकता है।
सात प्रमुख इंटरनेट केबलों पर खतरे की चर्चा
रिपोर्ट में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के राजनीतिक मामलों के उप-प्रमुख यादुल्लाह जवानी के बयान का भी उल्लेख किया गया है। उनके मुताबिक, यदि ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमला होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को निशाना बनाया जा सकता है।
हालांकि, इन बयानों को संभावित कार्रवाई की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि केबलों पर हमला करने का कोई अभियान शुरू हो चुका है या किसी निश्चित केबल को नुकसान पहुंचाया गया है।
क्या पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो सकता है?
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के अनुसार, दुनिया का लगभग 99 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी केबलों के माध्यम से गुजरता है। यही वजह है कि इन केबलों की सुरक्षा वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी एक समुद्री क्षेत्र में केबलों को नुकसान पहुंचने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा। टेलीकम्युनिकेशन रिसर्च फर्म टेलीजियोग्राफी के रिसर्च डायरेक्टर एलन मौल्डिन के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ का हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम है।
इसलिए संभावित नुकसान का असर मुख्य रूप से संबंधित क्षेत्र, इंटरनेट रूट और उन सेवाओं पर निर्भर करेगा जो प्रभावित केबलों पर निर्भर हैं। वैकल्पिक केबल मार्गों के जरिए कुछ ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है, हालांकि इससे देरी, नेटवर्क पर दबाव और सेवा बाधित होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
मध्य पूर्व के तनाव का डिजिटल दुनिया पर भी असर
ईरान की इस चेतावनी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि आधुनिक संघर्षों में ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ डिजिटल बुनियादी ढांचा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समुद्र के नीचे बिछी केबलों को नुकसान पहुंचने से इंटरनेट सेवाओं, कारोबार और अंतरराष्ट्रीय संचार पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव आगे किस दिशा में बढ़ता है। यदि संघर्ष तेज होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा केवल तेल और गैस की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन सकती है।




