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Raghopur Boat Tragedy : राघोपुर नाव हादसे पर तेजस्वी यादव का बड़ा आरोप, बोले सरकारी लापरवाही से गई बच्चों की जान

राघोपुर नाव हादसा: ‘बच्चे कई घंटे जिंदा थे, सरकार की लापरवाही से गई जान’, तेजस्वी यादव ने उठाए गंभीर सवाल

पटना/वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में हुए दर्दनाक नाव हादसे को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तेजस्वी का दावा है कि नाव हादसे के बाद पानी से निकाले गए कई बच्चे घंटों तक जीवित थे और समय पर चिकित्सा सहायता मिलती तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने राहत-बचाव कार्य में कथित देरी, एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी और अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

गंगा में नाव पलटने से गई कई लोगों की जान

यह दर्दनाक हादसा 13 अक्टूबर की शाम वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुआ। गंगा नदी में नाव पलटने से कई लोग पानी में डूब गए। हादसे के समय नाव पर सवार लोग भोज में शामिल होने जा रहे थे। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, नाव पर करीब 20 से अधिक लोग सवार थे। हादसे में बच्चों समेत कई लोगों की मौत हुई और कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। हालांकि, हादसे के बाद राहत-बचाव और चिकित्सा सहायता को लेकर उठे सवाल अब राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं।

‘तीन घंटे की देरी से पहुंची एसडीआरएफ टीम’

तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद आरोप लगाया कि प्रशासन को हादसे की सूचना मिलने के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम घटनास्थल पर करीब तीन घंटे की देरी से पहुंची। उन्होंने दावा किया कि तब तक स्थानीय ग्रामीण और तैराक कई लोगों को नदी से बाहर निकाल चुके थे।

तेजस्वी ने बचाव दल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि घटनास्थल पर पहुंचने के बाद भी बचाव कार्य अपेक्षित तेजी से नहीं हुआ। हालांकि, टीम के पहुंचने में वास्तविक देरी और राहत अभियान की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच से होनी बाकी है।

ऑक्सीजन की कमी और इलाज में देरी का आरोप

इस हादसे को लेकर तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों और स्थानीय तैराकों ने जिन बच्चों को पानी से बाहर निकाला था, उनमें से कई उस समय जीवित थे। तेजस्वी के मुताबिक, समय पर ऑक्सीजन और उचित उपचार उपलब्ध कराया जाता तो कुछ बच्चों की जान बच सकती थी।

राजद नेता ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस देर से पहुंची और उसमें ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि बच्चों को अस्पताल ले जाने के बाद वहां ऑक्सीजन, दवाओं और समुचित उपचार की कमी सामने आई।

तेजस्वी ने ऑक्सीजन की कमी के कारण पांच से छह बच्चों की मौत होने का आरोप लगाया है। हालांकि, मौतों के वास्तविक कारणों और चिकित्सा व्यवस्था में कथित खामियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

चार लाख रुपये के मुआवजे पर भी उठाए सवाल

बिहार सरकार ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने की घोषणा की है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पीड़ित परिवारों की जरूरतों को देखते हुए केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रत्येक प्रभावित परिवार को कम से कम तीन डिसमिल जमीन देने की मांग की है।

उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने और उनकी समस्याएं सुनने की अपील की। तेजस्वी का कहना है कि सरकार को प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई, जांच का इंतजार

हादसे के बाद प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वैशाली के जिलाधिकारी ने राघोपुर के अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा तथा उनके वेतन भुगतान पर रोक लगाने की कार्रवाई की। यह कदम घटना के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर उठे सवालों के बीच सामने आया है।

तेजस्वी यादव ने पूरे मामले की निष्पक्ष, न्यायिक जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नाव परिचालन की निगरानी, आपातकालीन एंबुलेंस सेवा, ऑक्सीजन की उपलब्धता और अस्पतालों में बेहतर उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

अब सरकार से जवाबदेही की मांग

राघोपुर नाव हादसे ने नदी के रास्ते आवागमन करने वाले लोगों की सुरक्षा और ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना में बच्चों की मौत से प्रभावित परिवार न्याय और जवाबदेही की उम्मीद कर रहे हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में राहत-बचाव कार्य में कथित देरी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। तेजस्वी यादव ने सरकार से जवाब मांगा है, जबकि आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। इस हादसे ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि आपात स्थिति में समय पर बचाव और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना कितना महत्वपूर्ण है।

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