टॉप न्यूज़राजनीति

Ballot Paper : राष्ट्रपति से मिले राहुल गांधी, वोट चोरी के सबूत देने का दावा, बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

राष्ट्रपति से मिले राहुल गांधी, बोले- ‘महामहिम को देंगे वोट चोरी के सबूत’, बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग तेज

नई दिल्ली: देश में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। इस दौरान विपक्ष ने कथित वोट चोरी, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी नेताओं ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी राष्ट्रपति के सामने रखी।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि राष्ट्रपति उनकी बातों को इस तरह सुनेंगी। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की ओर से उठाए गए वोट चोरी के आरोपों को खारिज नहीं किया। राहुल गांधी के मुताबिक, राष्ट्रपति ने उनसे पूछा कि इन आरोपों को साबित कैसे किया जाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि विपक्ष का प्रतिनिधिमंडल संबंधित सबूत राष्ट्रपति के सामने पेश करेगा।

ईवीएम हटाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

राष्ट्रपति भवन में हुई बैठक के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई मांगें रखीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि ईवीएम को हटाकर बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराए जाएं। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए उसकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखीं। हालांकि, वोट चोरी और चुनावी अनियमितताओं से जुड़े विपक्ष के आरोपों को संबंधित प्रमाणों के आधार पर परखा जाना बाकी है।

राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में रखीं चार प्रमुख मांगें

विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वर्ष 2023 के उस कानून को रद्द करने की मांग शामिल है, जिसे लेकर विपक्ष ने चुनाव आयुक्तों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर आपत्ति जताई है।

दूसरी मांग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को तत्काल रोकने और विपक्ष के दावे के अनुसार मतदाता सूची से गैरकानूनी तरीके से हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की है। तीसरी मांग सभी चुनावों में बैलेट पेपर की व्यवस्था दोबारा लागू करने की है। चौथी मांग पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की है, जिनमें विपक्ष के मुताबिक वोट चोरी के पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

ये सभी विपक्ष की ओर से रखी गई मांगें हैं। इन पर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिक्रिया और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

12 अक्टूबर को सीजेआई से मुलाकात करेगा विपक्ष

राहुल गांधी ने बताया कि विपक्षी प्रतिनिधिमंडल 12 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) से भी मुलाकात करेगा। इसके लिए प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन लेकर जाएगा। विपक्ष इस मामले में न्यायपालिका के समक्ष भी अपनी चिंताएं रखने की तैयारी कर रहा है।

राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सुप्रिया सुले, ममता बनर्जी, राजीव राय, मनोज झा, एमए बेबी, डी. राजा और उमर अब्दुल्ला समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल थे।

विजय चौक पर विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

राष्ट्रपति भवन में प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के दौरान विपक्ष के अन्य सांसद विजय चौक पर धरने पर बैठे रहे। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने प्रदर्शन में शामिल लोगों का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सड़कों पर उतरने वाले सभी देशभक्तों को वह सलाम करते हैं। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी बैलेट पेपर से मतदान कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई।

राजीव शुक्ला ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि विपक्ष के सभी सांसदों को राष्ट्रपति से मुलाकात का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के केवल 10 नेताओं को समय मिलने के कारण अन्य सांसदों ने विरोध मार्च निकालने का फैसला किया।

शुक्ला ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर सरकार डरी हुई है। उन्होंने दिल्ली में यातायात और सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी परेशानियों का भी जिक्र किया। इस बीच, विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों पर जवाब मिलना जरूरी है।

फिलहाल, राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष ने अपनी मांगों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। अब 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष होने वाली प्रस्तावित मुलाकात और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

Related Articles

Back to top button