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Dhami Government : उत्तराखंड के 106 युवाओं को विदेश में मिली नौकरी, धामी सरकार की योजना से बढ़े रोजगार के अवसर

उत्तराखंड के 106 युवाओं को विदेश में मिली नौकरी, धामी सरकार की योजना से खुल रहे रोजगार के नए रास्ते

देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार पाने का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास और विदेशी भाषा प्रशिक्षण पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत अब तक राज्य के 106 युवा विदेशों में नौकरी हासिल कर चुके हैं। इनमें 75 युवा जापान, 30 सऊदी अरब और एक युवा जर्मनी में कार्यरत है। ये युवा स्वास्थ्य सेवा, हॉस्पिटैलिटी और अन्य क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

विदेशी भाषा सीखकर विदेश में नौकरी पाने का अवसर

राज्य सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार हासिल करने के लिए केवल तकनीकी योग्यता ही नहीं, बल्कि संबंधित देश की भाषा और कार्य संस्कृति की जानकारी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में जर्मन और जापानी भाषा के प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को विदेशों में काम करने के लिए आवश्यक भाषा संबंधी दक्षता विकसित करने का अवसर मिल रहा है।

सरकारी जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में इस समय जर्मन और जापानी भाषा के कुल 158 प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं। सरकार की योजना इन प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार कर अधिक से अधिक युवाओं को विदेशों में रोजगार के लिए तैयार करना है।

देहरादून, अल्मोड़ा और बागेश्वर में चल रहे प्रशिक्षण केंद्र

विदेशी भाषा प्रशिक्षण के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में केंद्र स्थापित किए गए हैं। देहरादून में जर्मन भाषा के 75 और जापानी भाषा के 45 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, अल्मोड़ा में जर्मन भाषा के 22 तथा बागेश्वर में जापानी भाषा के 16 केंद्र चल रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत देहरादून में जर्मनी के लिए चार और जापान के लिए दो बैच संचालित हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा में जर्मन भाषा का एक और बागेश्वर में जापानी भाषा का एक बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में भी जल्द विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी है। इससे इन क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।

मई 2023 में मिली थी योजना को मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर मई 2023 में मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना को मंजूरी दी गई थी। योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत विदेश रोजगार प्रकोष्ठ का गठन किया गया।

इस पहल का उद्देश्य राज्य के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना और विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों तक उनकी पहुंच आसान बनाना है। इसके तहत भाषा प्रशिक्षण के साथ युवाओं की रोजगार संबंधी तैयारियों को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

जमैका, इथियोपिया और जाम्बिया में भी तलाशे जा रहे अवसर

उत्तराखंड सरकार अब जापान, जर्मनी और सऊदी अरब के अलावा दूसरे देशों में भी रोजगार की संभावनाएं तलाश रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री धामी ने जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी, इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम और जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा के साथ बैठक की थी।

इस दौरान संबंधित देशों में रोजगार की संभावनाओं और कुशल कर्मचारियों की मांग पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय बनाकर इन देशों में उपलब्ध नौकरियों और आवश्यक योग्यताओं की जानकारी जुटाई जाए। इसके बाद वहां की जरूरतों के अनुसार उत्तराखंड के युवाओं को कौशल और भाषा प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जाएगा।

युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। ऐसे में विदेशों में नौकरी के अवसरों से युवाओं को जोड़ने की पहल उनके करियर के विकल्प बढ़ा सकती है। हालांकि, इस दिशा में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, वास्तविक नौकरी के अवसरों, पात्रता और सुरक्षित नियुक्ति प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत 106 युवाओं को विदेश में नौकरी मिलना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार और नए देशों में रोजगार की संभावनाएं तलाशने के प्रयासों से उम्मीद है कि आने वाले समय में अधिक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर मिल सकेगा।

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