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Fuel Tax Cut : डीजल और एटीएफ पर विंडफॉल टैक्स घटा, निर्यात करने वाली कंपनियों को मिली बड़ी राहत

1 अक्टूबर से डीजल और एटीएफ पर घटा विंडफॉल टैक्स, जानिए नए शुल्क और आम लोगों पर असर

नई दिल्ली। अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ पेट्रोलियम सेक्टर से जुड़ा एक अहम बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती कर दी है। सरकार की ओर से जारी नई दरें 1 अक्टूबर से प्रभावी हो गई हैं। इस फैसले से पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाली कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी। हालांकि, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लागू उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और संबंधित सेस को कम किया गया है। पहले यह शुल्क कुल 20 रुपये प्रति लीटर था, जिसे अब घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी डीजल के निर्यात पर कंपनियों को प्रति लीटर 4 रुपये की राहत मिली है।

इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी विमान ईंधन के निर्यात पर भी विंडफॉल टैक्स कम किया गया है। एटीएफ पर पहले 15 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया जा रहा था। नई व्यवस्था में इसे घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह एटीएफ के निर्यात पर प्रति लीटर 4.5 रुपये की कटौती हुई है।

पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लागू शुल्क में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया है। पेट्रोल के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 50 पैसे प्रति लीटर के स्तर पर ही बनी रहेगी। इसका मतलब है कि मौजूदा बदलाव मुख्य रूप से डीजल और एटीएफ के निर्यात शुल्क से संबंधित है।

घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा?

इस फैसले को लेकर सबसे बड़ा सवाल आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क या अन्य घरेलू करों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इसलिए केवल निर्यात शुल्क में हुई कटौती को घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल बदलाव से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। पेट्रोल पंप पर मिलने वाली कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और अन्य स्थानीय कर शामिल हैं।

हर 15 दिन में होती है विंडफॉल टैक्स की समीक्षा

विंडफॉल टैक्स ऐसी असाधारण कमाई पर लगाया जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के कारण तेल कंपनियों को हो सकती है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल आता है, तब घरेलू स्तर पर रिफाइनिंग और निर्यात करने वाली कंपनियों के मुनाफे में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए इस टैक्स की समीक्षा करती है। आम तौर पर इसकी दरों की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है। वैश्विक कीमतों में बदलाव के अनुसार शुल्क को बढ़ाया या घटाया जा सकता है।

मौजूदा कटौती ऐसे समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों को लेकर उतार-चढ़ाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी देखा जा रहा है। सरकार के इस फैसले से निर्यात करने वाली रिफाइनिंग कंपनियों पर टैक्स का बोझ कुछ कम होगा, जबकि घरेलू ईंधन पर लागू कर व्यवस्था में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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