
क्या है पूरा मामला?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के साथ अटारी-वाघा बॉर्डर से आवाजाही पर रोक लग गई थी। इसका सीधा असर उन पाकिस्तानी सिंधी परिवारों पर पड़ा, जिनकी बेटियों की भारत में पहले से सगाई हो चुकी थी। करीब 150 पाकिस्तानी युवतियों की शादियां अटक गई थीं।

इसके बाद नागपुर के सिंधी समुदाय के प्रतिनिधियों और पाकिस्तान के सिंध प्रांत स्थित शदानी दरबार ने ऐसे परिवारों की सूची तैयार की, जिनकी शादियां भारत में तय थीं। इस सूची के आधार पर गृह मंत्रालय से विशेष अनुमति और वीजा की मांग की गई।
बॉर्डर बंद था तो भारत कैसे पहुंचीं?
गृह मंत्रालय ने इन महिलाओं और उनके परिजनों को भारत आने की अनुमति तो दी, लेकिन अटारी-वाघा बॉर्डर से प्रवेश की अनुमति नहीं थी। इसके बजाय उन्हें हवाई मार्ग से आने की शर्त रखी गई।
इसके बाद कई दुल्हनें मस्कट, दुबई, कोलंबो, ढाका और कतर जैसे देशों के रास्ते ट्रांजिट फ्लाइट लेकर भारत पहुंचीं। यानी पाकिस्तान से सीधे भारत आने के बजाय उन्हें तीसरे देशों के जरिए लंबा हवाई सफर करना पड़ा।
भारत पहुंचने के बाद इनकी शादियां नागपुर, रायपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, पुणे और भोपाल समेत अलग-अलग शहरों में हुईं। रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल से करीब 150 दुल्हनें अपने परिवारों के साथ इस प्रक्रिया के जरिए भारत पहुंच चुकी हैं।
कई परिवार शादी में नहीं हो सके शामिल
वीजा और यात्रा संबंधी पाबंदियों के कारण सभी रिश्तेदार दुल्हनों के साथ भारत नहीं आ सके। कुछ मामलों में केवल सीमित संख्या में परिजनों को अनुमति मिली। एक मामले में दुल्हन मस्कट के रास्ते नागपुर पहुंची, लेकिन उसके माता-पिता पाकिस्तान में ही रह गए और केवल उसका भाई भारत आ सका।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में अभी करीब 300 और महिलाएं भारतीय युवकों से शादी के लिए वीजा का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में इन 150 शादियों के बाद बाकी परिवारों को भी सरकार की ओर से अनुमति मिलने की उम्मीद है।
यानी बॉर्डर बंद होने के बाद भी शादी का रिश्ता नहीं रुका—सीधी सीमा पार करने के बजाय इन दुल्हनों ने तीसरे देशों के रास्ते भारत पहुंचकर अपनी शादी पूरी की।




