टॉप न्यूज़व्यापार

Crude Oil Crash : मिडिल ईस्ट तनाव घटते ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, वैश्विक बाजार को राहत मिली

मिडिल-ईस्ट में तनाव घटते ही कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, 7% तक लुढ़के दाम; फिर भी महीनेभर में 40% महंगा तेल

नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव कम होने के संकेत मिलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को कारोबार के दौरान कच्चे तेल के दाम करीब 7 प्रतिशत तक टूटकर 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए। हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद कुछ रिकवरी भी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा लगातार दूसरी रात ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं करने और क्षेत्र में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कमजोर पड़ी हैं, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला।

अमेरिका ने रोकी सैन्य कार्रवाई, बाजार को मिली राहत

कमोडिटी बाजार के जानकार और केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, अमेरिका ने शुक्रवार रात से ईरान के खिलाफ अपने हमलों पर रोक लगा रखी है। ईरान द्वारा जवाबी सैन्य कार्रवाई फिलहाल नहीं करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ओमान के साथ बातचीत शुरू करने के बाद क्षेत्र में तनाव कुछ कम हुआ है। इसी वजह से निवेशकों की चिंताएं घटीं और तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के जिजान और यानबू बंदरगाहों के पास सऊदी अरामको की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले का दावा किया है। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि क्षेत्र में भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बरकरार हैं।

बड़ी गिरावट के बावजूद इस महीने 40% महंगा है कच्चा तेल

विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार की तेज गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी इस महीने की शुरुआत की तुलना में करीब 40 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं। इसकी बड़ी वजह मिडिल-ईस्ट में लगातार बना तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्गों पर बढ़ा जोखिम है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसके जरिए सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। वहीं लाल सागर के रास्ते भी ऊर्जा आपूर्ति होती है। ऐसे में इन क्षेत्रों में किसी भी तरह का तनाव तेल बाजार पर सीधा असर डालता है।

किस भाव पर कारोबार कर रहा है कच्चा तेल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार सुबह विभिन्न बेंचमार्क क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

  • WTI Crude लगभग 4.21% की गिरावट के साथ 85.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
  • Brent Crude करीब 3.84% टूटकर 93.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
  • वहीं Murban Crude में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली और इसके दाम 9.44% लुढ़ककर 97.05 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल-ईस्ट में हालात और सामान्य होते हैं तो तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, किसी भी नए सैन्य घटनाक्रम से बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।

WTI, Brent और Murban Crude में क्या है अंतर?

दुनिया में कच्चे तेल की कीमत तय करने के लिए मुख्य रूप से WTI, Brent और Murban तीन प्रमुख बेंचमार्क का इस्तेमाल किया जाता है। तीनों कच्चे तेल हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता, उत्पादन क्षेत्र और बाजार अलग-अलग हैं।

WTI (West Texas Intermediate) अमेरिका में उत्पादित होने वाला हल्का और उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा तेल है। इसका सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है और इसे घरेलू ऊर्जा बाजार का प्रमुख संकेतक माना जाता है।

Brent Crude उत्तरी सागर (North Sea) से निकाला जाता है। यह यूरोप, अफ्रीका और एशिया के अधिकांश देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क माना जाता है और वैश्विक तेल व्यापार में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है।

Murban Crude संयुक्त अरब अमीरात (अबू धाबी) में उत्पादित होता है। यह हल्के और कम सल्फर वाले कच्चे तेल की श्रेणी में आता है तथा एशिया और मिडिल-ईस्ट के देशों में इसकी मांग अधिक रहती है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो इससे आयात बिल कम हो सकता है। लंबे समय तक कीमतें नीचे रहने की स्थिति में पेट्रोल और डीजल की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू ईंधन कीमतों पर अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करता है।

फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल-ईस्ट की भू-राजनीतिक स्थिति, अमेरिका-ईरान के अगले कदम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री गतिविधियों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन्हीं घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय होगी।

Related Articles

Back to top button