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Bengal Politics : तस्लीमा नसरीन के बंगाल दौरे पर दिलीप घोष का विपक्ष पर तीखा हमला, सियासत गरमाई

तस्लीमा नसरीन के बंगाल दौरे पर सियासत तेज, दिलीप घोष ने टीएमसी और विपक्ष पर साधा निशाना, सिद्दीकुल्लाह चौधरी को बताया 'भोंपू'

कोलकाता। बांग्लादेश मूल की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन के संभावित पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने विपक्ष और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास वैध पासपोर्ट, वीजा और सरकार की अनुमति है, तो उसे देश के किसी भी हिस्से में आने-जाने का अधिकार है। साथ ही उन्होंने अतीत की उन घटनाओं का भी जिक्र किया, जब तस्लीमा नसरीन को विरोध प्रदर्शनों के बीच पश्चिम बंगाल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।

‘वैध अनुमति हो तो किसी को आने से नहीं रोका जा सकता’

दिलीप घोष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक या विदेशी के पास वैध यात्रा दस्तावेज और आवश्यक सरकारी अनुमति है, तो उसे कहीं भी आने-जाने से नहीं रोका जाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कुछ राजनीतिक दलों ने खुद को धर्मनिरपेक्ष बताकर कट्टरपंथी तत्वों के सामने झुकने का काम किया, जिसका परिणाम पूरे राज्य को भुगतना पड़ा।

तस्लीमा नसरीन विवाद की पुरानी घटनाओं का किया जिक्र

दिलीप घोष ने अपने बयान में उन पुराने घटनाक्रमों को याद किया, जब तस्लीमा नसरीन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उन्होंने कहा कि उस समय कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में हिंसा, आगजनी और दंगे जैसी स्थिति बन गई थी।

उनके अनुसार, हजारों वाहन क्षतिग्रस्त हुए, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि स्कूल से लौट रहे बच्चों और यात्रियों को भी उस दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था।

सीपीएम और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि उस समय की घटनाओं के पीछे वामपंथी दलों की भूमिका रही थी। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी कई स्थानों पर सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय तक ऐसे तत्वों को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहा, जिसकी वजह से कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि, इन आरोपों पर विपक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

‘अब हालात बदल चुके हैं’

दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया है और जो लोग हिंसा या अवैध गतिविधियों में शामिल होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सिद्दीकुल्लाह चौधरी पर भी बोला हमला

टीएमसी नेता सिद्दीकुल्लाह चौधरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने उन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ नेता केवल दूसरों के इशारों पर बयान देते हैं और राजनीतिक माहौल को अनावश्यक रूप से गर्माने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानून की सीमा से बाहर जाकर अशांति फैलाने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अभिषेक बनर्जी के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के उस बयान पर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि यदि बागी सांसदों की पार्टी में वापसी होती है तो वह इस्तीफा दे देंगे।

इस पर दिलीप घोष ने कहा कि यह पूरी तरह उनका आंतरिक राजनीतिक मामला है और इससे भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ता।

‘वंदे मातरम’ बिल पर कही बड़ी बात

संसद में प्रस्तावित ‘वंदे मातरम’ बिल को लेकर भी दिलीप घोष ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि राष्ट्रगीत के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उनके अनुसार, यदि किसी कानून के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होती है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

बंगाल की राजनीति में फिर गरमाया माहौल

तस्लीमा नसरीन के संभावित दौरे और उससे जुड़े राजनीतिक बयानों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज कर दी है। भाजपा और टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इस पूरे विवाद और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाती है तथा तस्लीमा नसरीन के संभावित दौरे को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है।

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