हमीरपुर जिले में प्रशासन का एक बेहद मानवीय और संवेदनशील चेहरा उस समय देखने को मिला, जब जिला अधिकारी घनश्याम मीणा ने एक दिव्यांग बुजुर्ग की मदद कर समाज के लिए मिसाल कायम की। कलेक्ट्रेट कार्यालय में हुए इस भावुक दृश्य ने न केवल बुजुर्ग का दिल जीत लिया, बल्कि आम जनता के बीच भी प्रशासन की सकारात्मक छवि को मजबूत किया।
गोहांड क्षेत्र के निवासी एक बुजुर्ग दिव्यांग व्यक्ति की समस्या की जानकारी जब जिला अधिकारी घनश्याम मीणा तक पहुंची, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया। डीएम के निर्देश पर प्रशासनिक स्टाफ द्वारा बुजुर्ग को कलेक्ट्रेट कार्यालय बुलवाया गया। जैसे ही बुजुर्ग कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिला अधिकारी ने स्वयं उनसे मुलाकात की और उनकी स्थिति को समझा।
जिला अधिकारी घनश्याम मीणा ने बुजुर्ग की दैनिक परेशानियों को देखते हुए उन्हें एक ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई, ताकि वह बिना किसी परेशानी के आवागमन कर सकें और अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें। इसके साथ ही कड़ाके की ठंड को ध्यान में रखते हुए डीएम ने बुजुर्ग को एक कंबल भी भेंट किया। सहायता पाकर बुजुर्ग भावुक हो उठे और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर बुजुर्ग के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि जिला अधिकारी स्वयं उनकी मदद के लिए आगे आएंगे। यह सहयोग उनके जीवन में बड़ी राहत लेकर आया है।
इस पहल को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों और स्थानीय नागरिकों के बीच भी जिला प्रशासन की जमकर सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि जब उच्च पद पर बैठे अधिकारी इस तरह संवेदनशीलता दिखाते हैं, तो आम जनता का प्रशासन पर भरोसा और मजबूत होता है।
जिला अधिकारी घनश्याम मीणा ने इस अवसर पर कहा कि प्रशासन का दायित्व केवल नियमों का पालन कराना ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद और कमजोर वर्ग की मदद करना भी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिले में किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को सहायता की आवश्यकता होगी, तो प्रशासन हर संभव मदद के लिए तत्पर रहेगा।
इस मानवीय पहल ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशील सोच और त्वरित कार्रवाई से प्रशासन आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। हमीरपुर में डीएम की यह पहल आने वाले समय में अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
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