जनपद बलरामपुर में आंगनबाड़ी चयन प्रक्रिया के नाम पर रिश्वत मांगने और लेने का गंभीर मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दो बाबू और एक बिचौलिये ने मिलकर 1 लाख 40 हजार रुपये की अवैध वसूली की। मामले की पुष्टि होते ही प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया है।
यह पूरा मामला विकासखंड तुलसीपुर के ग्राम लालबोझी से जुड़ा है, जहां आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया-2025 के दौरान पैसे के लेन-देन की शिकायत जिला प्रशासन को प्राप्त हुई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर 5 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी, जिसने पूरे प्रकरण की गहन जांच की।
जांच समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सामने आया कि परियोजना कार्यालय तुलसीपुर में तैनात परियोजना लिपिक जमुना प्रसाद और तत्कालीन नियुक्ति पटल बाबू रामसूचित वर्मा ने आंगनबाड़ी चयन के नाम पर कुल 1 लाख 40 हजार रुपये की रिश्वत ली। जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि इस पूरे लेन-देन में बिचौलिया मुन्नालाल जायसवाल की अहम भूमिका रही, जो अभ्यर्थियों से संपर्क कर पैसा वसूलने का काम कर रहा था।
रिपोर्ट मिलते ही जिला प्रशासन ने बिना किसी देरी के तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश माना जा रहा है।
इतना ही नहीं, जांच समिति ने चयनित आंगनबाड़ी कार्यकत्री के आय प्रमाण पत्र पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में आय प्रमाण पत्र की पुनः तहसील स्तर से जांच कराने की संस्तुति की गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चयन पूरी तरह नियमों और पात्रता के अनुरूप हुआ है या नहीं।
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि जनपद में होने वाली सभी भर्तियां पूर्णतः पारदर्शी और मेरिट के आधार पर कराई जाएंगी। किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या दलाली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी से भर्ती के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं, तो उसकी तुरंत शिकायत प्रशासन या संबंधित अधिकारियों से करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
आंगनबाड़ी भर्ती जैसे संवेदनशील और सामाजिक सरोकार से जुड़े पदों में रिश्वतखोरी का यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन की सख्ती से आम लोगों में भरोसा बढ़ा है। साथ ही यह उम्मीद भी जगी है कि भविष्य में ऐसी अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी और योग्य अभ्यर्थियों को उनका हक मिल सकेगा।
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