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बांदा: 3 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को मिली फांसी की सजा, कोर्ट ने कहा – ‘माफी के लायक नहीं’

बांदा, 08 सितंबर, 2025: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की एक सत्र अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसके बाद हत्या करने के जघन्य अपराध में दोषी पाए गए सुनील कुमार निषाद को अदालत ने मृत्युदंड की सज़ा सुनाई है। इस फैसले को “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत पुलिस की तेज और प्रभावी कार्रवाई का नतीजा माना जा रहा है, जिसने महज़ तीन महीने के भीतर दरिंदे को उसके किए की सज़ा दिलवाई।

क्या था पूरा मामला?

यह दिल दहला देने वाली घटना इसी साल 3 जून, 2025 को चिल्ला थाना क्षेत्र में घटी थी। आरोपी सुनील कुमार निषाद ने एक तीन वर्षीय मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया था। बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद, उसने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उसे मरने के लिए जंगल में फेंक दिया था। गंभीर रूप से घायल बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ ज़िंदगी और मौत से एक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उसने दम तोड़ दिया था। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश और शोक की लहर दौड़ा दी थी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’

मामले की गंभीरता को देखते हुए बांदा के पुलिस अधीक्षक (SP) पलाश बंसल के निर्देशन में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। आरोपी सुनील कुमार निषाद को एक पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। सरकार द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत इस मामले को प्राथमिकता पर रखा गया, जिसका उद्देश्य जघन्य अपराधों में दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना है। पुलिस ने त्वरित विवेचना करते हुए महज़ कुछ ही दिनों में पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल की।

अदालत में प्रभावी पैरवी और ऐतिहासिक फैसला

अदालत में इस केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मज़बूती से अपना पक्ष रखा। लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम और शिवपूजन सिंह ने पुलिस द्वारा एकत्र किए गए सबूतों और गवाहों को अदालत के सामने प्रस्तुत किया। पुलिस टीम और अभियोजन के अथक प्रयासों का ही परिणाम रहा कि अदालत ने इस मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम (Rarest of the Rare) मानते हुए आरोपी सुनील कुमार निषाद को दोषी करार दिया।

आज, 8 सितंबर, 2025 को सत्र अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए दोषी सुनील कुमार निषाद को फांसी की सज़ा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर ₹65,000 का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

पुलिस अधीक्षक ने कहा – ‘यह न्याय की जीत है’

फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए बांदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने कहा, “यह न्याय की जीत है। हमारी टीम ने दिन-रात एक कर के इस मामले में सबूत जुटाए और यह सुनिश्चित किया कि दोषी को उसके किए की सख़्त से सख़्त सज़ा मिले। ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत हमारा लक्ष्य ऐसे अपराधियों को रिकॉर्ड समय में सज़ा दिलाकर समाज में एक कड़ा संदेश देना है। यह फैसला उस मासूम बच्ची को सच्ची श्रद्धांजलि है।”

इस ऐतिहासिक फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और जघन्य अपराध करने वाले किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। यह निर्णय भविष्य में ऐसे घृणित अपराधों को रोकने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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