लखीमपुर खीरी। जिले में किसानों के लिए सबसे अहम खाद यूरिया की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताज़ा मामला फूलबेहड़ क्षेत्र से सामने आया है, जहां नेपाल बॉर्डर की तरफ जा रही एक पिकअप वाहन (UP 31 BT 5746) को पुलिस ने 75 से अधिक बोरी यूरिया खाद के साथ पकड़ा।
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई मुखबिर की सटीक सूचना पर हुई। बताया जाता है कि पिकअप वाहन में करीब 75 बोरी यूरिया खाद लदी थी। शुरू में इसे ढ़खेरवा चौकी पुलिस ने रोका, लेकिन महज़ 15 मिनट बाद गाड़ी को छोड़ दिया गया।
पत्रकारों ने जब इस मामले की सूचना पढ़ुआ थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विवेक उपाध्याय को दी तो वे तत्काल मौके पर पहुंचे और पिकअप को अपने कब्जे में लेकर थाना परिसर में खड़ा करवा दिया। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भी दी गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मौके पर कोई भी आला अधिकारी तब तक नहीं पहुंचा जब तक पत्रकार वहां मौजूद रहे।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया खाद बिना किसी दस्तावेज़, आधार कार्ड, रिसीविंग या रसीद के कहां जा रही थी और किसके संरक्षण में जा रही थी?
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क्या यह पूरा खेल कालाबाजारी का हिस्सा है?
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क्या प्रशासन और समितियों की अनदेखी से ही किसानों के हिस्से का यूरिया खुलेआम बॉर्डर पार भेजा जा रहा है?
किसानों की बढ़ी परेशानी
गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी जिले में इस समय किसान खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं। समितियों पर लंबे समय से कालाबाजारी के आरोप लगते रहे हैं। यदि जिले की सभी समितियों की सही तरीके से जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
किसान संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से साफ है कि जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यूरिया की इतनी बड़ी खेप का निकलना संभव ही नहीं है। किसानों का आरोप है कि वे समितियों से खाद लेने जाते हैं तो उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ता है, कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है, लेकिन दूसरी तरफ ट्रक और पिकअप भरकर यूरिया खाद बाजार से गायब हो जाती है।
प्रशासन की साख दांव पर
यह मामला सिर्फ एक पिकअप का नहीं है बल्कि प्रशासन की कार्यशैली और ईमानदारी पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते इस गोरखधंधे पर अंकुश नहीं लगाया गया तो किसानों को और अधिक संकट का सामना करना पड़ेगा।
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