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जोशीमठ में नहीं टला अभी भू-धंसाव का खतरा, पढ़े पूरी ख़बर

जोशीमठ में जेपी कॉलोनी के बाद एक नई जगह से पानी का रिसाव के बाद माना जा रहा है कि खतरा अभी टला नहीं। मौके पर गईं वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान की वरिष्ठ भू-विज्ञानी डॉ. स्वप्नमिता चौधरी वैदेश्वरन ने कहा-लगता है जमीन के भीतर कहीं पर रिजरवायर बना था और दरार खुलते ही उसमें से पानी निकलने लगा।
इसका मतलब है कि अभी जमीन और धंस सकती है। डॉ. स्वप्नमिता शनिवार को दून लौट गईं। उन्होंने ही जोशीमठ का 2006 में भू-गर्भीय अध्ययन किया। 2022 में आपदा प्राधिकरण की टीम में भी वे विशेषज्ञ की हैसियत से शामिल रहीं। उन्होंने कहा, जोशीमठ में ताजा स्थिति उहापोह वाली है। भवनों में दरारें आ रही, कई जगह जमीन धंस रही है। जोशीमठ के जल प्रबंधन पर उठ  रहे सवाल सितंबर 2022 में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में हुए जोशीमठ के वैज्ञानिक सर्वे में मानकों के विपरीत भारी निर्माण, औली की बर्फीली ढलान से आने वाले पानी एवं शहर के आसपास के 11 बड़े नालों को भू-धंसाव की वजह बताया गया। जोशीमठ क्षमता से अधिक बोझ सह रहा है। यह भौगोलिक रूप से अस्थिर है। भूकंप के अतिसंवेदनशील जोन-फाइव में है। एटी नाला, रविग्राम सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। डॉ. स्वप्नमिता के मुताबिक, हम यह पता करना चाहते हैं कि क्या जोशीमठ के पास बन रही सुरंग की वजह से ही भू-धंसाव हो रहा है? यह सुरंग अभी तक छह किमी ही खोदी गई है। इस समय जहां पानी का रिसाव जेपी कॉलोनी के पास हो रहा है, सुरंग उससे काफी पीछे परसारी तक ही बनी है। समाधान के लिए वैज्ञानिकों के सुझाव ढलानों में पानी की निकासी का विशेष प्रबंध हो। नालों को चैनेलाइज कर कटाव रोका जाए। अन्यथा नाले तेज बहाव के समय रास्ते भी बदल सकते हैं। बस्तियों में धंसाव कम करने को ट्रीटमेंट हों, दरारों को तेजी से भरा जाए। पौधरोपण की कार्ययोजना बने। सीवर सिस्टम मजबूत हो। सॉकपिट बंद किए जाएं। रविग्राम, सुनील, गांधीनगर में व्यावसायिक एवं आवासीय भवनों की गतिविधियां बंद हों। नालों के आसपास से लोगों को शिफ्ट किया जाए। सुरंग में फंसी है मशीन जोशीमठ मसले पर आम जनता की आवाज उठा रहे सामाजिक कार्यकर्ता इंद्रेश मैखुरी भी इस समय जोशीमठ में ही हैं। उनके मुताबिक, 2009 से सुरंग का काम चल रहा है। छह किमी खुदाई के बाद हेलंग की ओर से इसमें काम कर रही टनल बोरिंग मशीन खराब होकर फंसी हुई है। सुरंग से पहले छह सौ लीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से पानी निकल रहा था। फिर यह रफ्तार कम होकर दो सौ लीटर प्रति सेकेंड पर आ गई। पानी अभी भी निकल रहा है। सात फरवरी 2021 को रैणी हादसे के बाद सुरंग में मलबा घुसने से रास्ते बंद हुए थे, उसे खोलने को एनटीपीसी ने कथित रूप से विस्फोटक प्रयोग किए। इसके बाद भू-धंसाव में तेजी आई। लोग सुरंग को मानते हैं भू-धंसाव का जिम्मेदार जोशीमठ में जमीन खिसकने की प्रमुख वजह स्थानीय लोग एनटीपीसी की सुरंग एवं दूसरे बड़े निर्माण कार्यों को मान रहे हैं। वहीं, जोशीमठ से दूरी की वजह से ही वैज्ञानिकों ने 2022 की सर्वे रिपोर्ट में एनटीपीसी की सुरंग का जिक्र नहीं किया। फिलहाल सरकार ने एनटीपीसी की सुरंग की जांच के आदेश दिए हैं और सुरंग का काम भी रोक दिया गया है। यह सुरंग विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना का हिस्सा है, जो धौलीगंगा नदी पर बनी है। सात फरवरी 2021 को रैणी गांव के पास प्राकृतिक आपदा में एनटीपीसी की इसी सुरंग में मलबे के साथ बहुत सा पानी घुस गया था। हादसे में सौ से अधिक मारे गए और कई लापता हुए थे।  

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