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उन्नाव: बांग्लादेशी युवक नसीम पकड़ा गया, टीकर गढ़ी गांव का नाम दस्तावेजों में देखकर चौंके ग्रामीण

उन्नाव। लखनऊ एयरपोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां एक बांग्लादेशी नागरिक नसीम को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह मलेशिया जाने की तैयारी में था। उसके पास से पासपोर्ट समेत जो दस्तावेज बरामद किए गए, उनमें उन्नाव जिले के टीकर गढ़ी गांव का नाम दर्ज पाया गया। यह जानकारी सामने आते ही उन्नाव पुलिस हरकत में आई और सीधे गांव पहुंच गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर नसीम ने कूट रचित दस्तावेज कैसे तैयार कर लिए और क्या वास्तव में उसका इस गांव से कोई संबंध है।

गांव वालों ने जताई हैरानी

टीकर गढ़ी गांव का नाम आते ही ग्रामीणों और प्रधान प्रतिनिधि देवेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि नसीम नाम का कोई भी व्यक्ति कभी भी इस गांव में नहीं रहा है। गांव वालों ने बताया कि उन्होंने पुलिस को लिखित में भी दे दिया है कि इस नाम का व्यक्ति यहां निवास नहीं करता। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें खुद इस नाम को सुनकर हैरानी हुई है।

इंडस्ट्रियल एरिया की वजह से जताई शंका

हालांकि, ग्रामीणों और प्रधान प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि टीकर गढ़ी और आसपास का इलाका बड़ा इंडस्ट्रियल क्षेत्र है। यहां पर मजदूरी और काम की तलाश में दूसरे जिलों और प्रदेशों से लोग आकर किराए पर घर लेकर रहते हैं। ग्रामीणों का अनुमान है कि संभव है नसीम भी कभी यहां किराए पर रहा हो और इसी आधार पर उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए हों।

मीडिया टीम पहुंची गांव

जब मीडिया टीम गांव पहुंची तो प्रधान प्रतिनिधि देवेंद्र यादव और कोटेदार ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने नसीम को कभी गांव में नहीं देखा। देवेंद्र यादव ने कहा –
“हमारे गांव में नसीम नाम का कोई आदमी कभी नहीं रहा। पुलिस को हमने लिखकर भी दे दिया है। हालांकि यहां बड़े पैमाने पर बाहर से मजदूर आकर किराए पर रहते हैं। हो सकता है इसी वजह से उसने कूट रचित दस्तावेज बनवा लिए हों।”

जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि नसीम ने दस्तावेज तैयार करने के लिए कौन-सा रास्ता अपनाया और क्या इस काम में किसी स्थानीय व्यक्ति ने उसकी मदद की। साथ ही पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं और लोग भी तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इस इलाके में नहीं रह रहे।

बड़ा सवाल

यह मामला कई सवाल खड़े करता है। अगर नसीम जैसा बांग्लादेशी नागरिक फर्जी कागजों के जरिए भारतीय दस्तावेज बनवाने में सफल हो सकता है तो फिर यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। क्या टीकर गढ़ी जैसे इंडस्ट्रियल एरिया में और भी लोग नकली दस्तावेजों के आधार पर रह रहे हैं? यह सवाल अब पुलिस और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती है।

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