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UP: रेलवे लाइन से पानी का रिसाव रुका… मगर खतरा बरकरार, मैलानी-नानपारा रूट की ट्रेनें 14 जुलाई तक निरस्त

पलिया में अतरिया रेलवे क्रॉसिंग के आगे हो रहे पानी के रिसाव को तो कड़ी मेहनत के बाद रोक लिया गया है। अब रेलवे लाइन के दोनों किनारों को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है। इसके चलते ट्रेनों का निरस्तीकरण 14 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।

मैलानी जंक्शन – फोटो

मैलानी-नानपारा रेल मार्ग पर पलिया की अतरिया रेलवे क्रॉसिंग के पास हो रहे पानी के रिसाव को रोके जाने के बाद अभी रेल लाइन से खतरा टला नहीं है। इसके चलते ट्रेनों का निरस्तीकरण 14 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है। एक सप्ताह पहले पानी का रिसाव होने से निरस्तीकरण सात जुलाई तक था, अब सात दिन और बढ़ा दिए गए हैं।

पानी का रिसाव बंद होने और पटरी दुरुस्त होने पर आठ जुलाई से ट्रेनों का संचालन होने की उम्मीद थी, लेकिन एक दिन पहले रिसाव बंद होने के बाद भी पटरी के दोनों किनारों को मजबूत करने का काम अभी बाकी है। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के जन संपर्क अधिकारी महेश गुप्ता ने बताया कि मरम्मत कार्य पूरा न होने के चलते निरस्तीकरण 14 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।

इधर, मैलानी, पलिया, तिकुनिया क्षेत्र के अधिकांश लोगों को इसी रेल मार्ग से बहराइच-गोंडा की ओर आना जाना रहता है, लेकिन ट्रेनों के बंद होने से अब लोगों को सड़क मार्ग से जाना पड़ रहा है। किराया अधिक लगने के साथ ही परेशानी और समय भी अधिक लगता है। 

पिछले साल भी बंद हुआ था यह मार्ग
मैलानी-नानपारा खंड के भीरा-पलिया के बीच पिछले साल भी पानी का रिसाव होने से रेल ट्रैक क्षतिग्रस्त होने के चलते कई महीने ट्रेनों का संचालन बंद रहा था। बारिश और बाढ़ खत्म होने और पटरियों की मरम्मत के बाद ट्रेनों का संचालन किया गया।

दोनों किनारों को मजबूत करने में जुटे कारसेवक
पलिया-भीरा मार्ग पर अतरिया रेलवे क्रॉसिंग के समीप पानी के रिसाव को तो कड़ी मेहनत के बाद रोक लिया गया है, लेकिन अब दोनों किनारों को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है। एक तरफ जाल में जहां बोरियों में मौरंग व मिट्टी भरकर किनारों को मजबूत किया जा रहा है। दूसरी तरफ से लोहे के जाल में बोल्डर व पत्थरों को डालकर कटान को पूरी तरह से बंद करने का कार्य किया जा रहा है।

पिछले रविवार से महंगापुर गुरुद्वारा के संत बाबा गुरनाम सिंह के आह्वान पर रेल लाइन बचाने के लिए कारसेवा का कार्य किया जा रहा है। इसमें दूरदराज से कारसेवक आकर लगातार सेवा करने का कार्य कर रहे हैं। छह जुलाई को रेललाइन के नीचे से हो रहे पानी के रिसाव को पूरी तरह से कारसेवकों व रेलकर्मियों ने सेवा करते हुए बंद कर दिया था।

सोमवार को सुबह से दोनों किनारों की मजबूती करने पर कार्य होता रहा। बड़ी संख्या में कारसेवक डटे रहे और काफी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पत्थर, मौरंग, मिट्टी आदि लाने का कार्य रेललाइन के पास किया गया। इसके चलते दोनों तरफ से अलग-अलग तरीके से कटान को रोकने के लिए पटान का कार्य किया जा रहा है।

एक तरफ से तो बोल्डर, पत्थर डाले जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ से मिट्टी व मौरंग भरी बोरियों को प्लास्टिक के जालों में डालकर किनारों पर लगाने का कार्य हो रहा है, ताकि दूर-दूर तक कहीं से भी रेल ट्रैक दोबारा से न कट सके।

एसएसबी का आभार जताकर सौंपा स्मृति चिह्न
रेल लाइन पर हो रहे रिसाव को रोकने के लिए एसएसबी जवानों का भी काफी सक्रिय योगदान रहा। सोमवार को एसएसबी कमांडेंट रवींद्र कुमार राजेश्वरी जवानों के साथ मौके पर पहुंचे और कारसेवा करते हुए बोरियों को भरने और उनको जाल में डालने का कार्य किया। यहां गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की तरफ से कमांडेंट रवींद्र कुमार राजेश्वरी को स्मृति चिह्न भेंट करते हुए कारसेवा में तत्पर रहने और लगातार प्रत्येक दिन जवानों के सहयोग के लिए आभार जताया।

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