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Sunetra Pawar Rise : सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम, तीन अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ जब सुनेत्रा पवार ने अपने पति और पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के महज तीन दिनों बाद राज्य की उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। रविवार को मुंबई के लोकभवन (पहले राजभवन) में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
यह राज्य के इतिहास में पहली बार है जब किसी महिला ने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला है। सुनेत्रा पवार के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है।


अजित पवार के निधन के बाद पार्टी में तेज़ी से हुआ नेतृत्व परिवर्तन

28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार की असमय मृत्यु ने न केवल एनसीपी (नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी) बल्कि पूरे महाराष्ट्र को स्तब्ध कर दिया था।
अजित पवार, जो राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के अध्यक्ष थे, हमेशा से पार्टी के संगठनात्मक और प्रशासनिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते रहे।
उनके निधन के बाद पार्टी में शून्य पैदा हो गया था, जिसे भरने के लिए विधायक दल ने एकमत से सुनेत्रा पवार को नेता चुन लिया।
सुनेत्रा, जो इससे पहले राज्यसभा सदस्य थीं, ने विधायक दल की कमान संभालने के साथ ही राज्यसभा से भी अपना इस्तीफा दे दिया।


शपथ के तुरंत बाद तीन अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी

शपथ ग्रहण समारोह के कुछ ही घंटे बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सिफारिश पर मुहर लगा दी।
फडणवीस ने एक औपचारिक पत्र के माध्यम से सुनेत्रा पवार को तीन प्रमुख मंत्रालय सौंपने की अनुशंसा की थी —

  1. राज्य आबकारी शुल्क विभाग (State Excise Department)

  2. खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय (Sports and Youth Welfare)

  3. अल्पसंख्यक विकास विभाग (Minority Development Department)

लोकभवन की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि ये तीन विभाग अब उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के अधीन रहेंगे।


राज्यपाल ने तुरंत दी मंजूरी

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने फडणवीस की चिट्ठी पर तुरंत कार्रवाई करते हुए मंजूरी दे दी।
माना जा रहा है कि यह निर्णय न केवल संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण कदम था।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह पूरा निर्णय महायुति गठबंधन (BJP-शिंदे शिवसेना-एनसीपी) के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति का भी हिस्सा था।


इन मंत्रालयों के राजनीतिक और प्रशासनिक मायने

राज्य आबकारी विभाग महाराष्ट्र सरकार के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत है।
इस विभाग के अधीन शराब लाइसेंस, उत्पाद शुल्क, और संबंधित व्यापारों की निगरानी आती है।
इसी विभाग से राज्य को हर साल हजारों करोड़ रुपये की आय होती है।
यह मंत्रालय सुनेत्रा पवार को देना यह दर्शाता है कि सरकार उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली प्रशासक के रूप में देख रही है।

वहीं, खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय राज्य के युवाओं से जुड़ा सबसे सक्रिय विभाग है।
सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी मिलने से माना जा रहा है कि वे ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर युवाओं के लिए नई योजनाएं शुरू कर सकती हैं।
अल्पसंख्यक विकास मंत्रालय उन्हें राज्य के विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बढ़ाने में मदद करेगा — जिससे उनकी राजनीतिक छवि और जनसंपर्क दोनों मज़बूत होंगे।


पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा – ‘राज्य की पहली महिला डिप्टी सीएम होने का गौरव’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनेत्रा पवार को राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा —

“सुनेत्रा पवार जी को महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल शुरू करने पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। वह इस जिम्मेदारी को संभालने वाली पहली महिला हैं। मुझे विश्वास है कि वह राज्य के लोगों की भलाई के लिए अथक प्रयास करेंगी और दिवंगत अजितदादा पवार के विजन को पूरा करेंगी।”

प्रधानमंत्री की इस शुभकामना पोस्ट को बीजेपी और एनसीपी नेताओं ने व्यापक रूप से साझा किया।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह केंद्र सरकार और राज्य नेतृत्व के बीच समन्वय और विश्वास का संकेत है।


राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में बड़ा संकेत

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि सुनेत्रा पवार का इतनी जल्दी शपथ लेना और तीन महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी पाना, एनसीपी में उनके बढ़ते कद को दिखाता है।
पार्टी के भीतर उन्हें ‘संवेदनशील लेकिन निर्णायक चेहरा’ माना जाता है।
अजित पवार की मृत्यु के बाद पार्टी को एक ऐसे चेहरे की आवश्यकता थी जो भावनात्मक रूप से जनता से जुड़ा हो और साथ ही संगठनात्मक रूप से अनुभवी भी हो।
सुनेत्रा पवार इन दोनों गुणों पर खरी उतरती हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आने वाले महीनों में जब बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा, तो सुनेत्रा पवार वहां से चुनाव लड़ सकती हैं।
इससे न केवल वे अपनी विधायकी सुनिश्चित करेंगी बल्कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत को भी आगे बढ़ाएंगी।


महिला सशक्तिकरण का नया प्रतीक

महाराष्ट्र की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब तक सीमित रही है।
सुनेत्रा पवार का यह पदभार महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
राज्य की पूर्व महिला नेताओं — जैसे प्रफुल्ला पाटिल, छगन भुजबल की बेटी प्रीती भुजबल, और सुप्रिया सुले — की तरह सुनेत्रा भी अब राज्य के निर्णयात्मक मंच पर पहुंच गई हैं।
उनका यह उदय आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया संतुलन स्थापित कर सकता है।


महायुति में शक्ति संतुलन का संकेत

एनसीपी (अजित गुट) महाराष्ट्र की महायुति सरकार का एक अहम घटक है।
सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाना और महत्वपूर्ण मंत्रालय देना इस गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को बनाए रखने का संकेत है।
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की जोड़ी पहले से सरकार चला रही थी, लेकिन अजित पवार के निधन के बाद सत्ता समीकरण में बदलाव की संभावना थी।
ऐसे में सुनेत्रा पवार का तेजी से सत्ता के केंद्र में आना इस बात का प्रमाण है कि गठबंधन स्थिरता बनाए रखना चाहता है।


बारामती की विरासत और जनता की अपेक्षाएं

बारामती, जो दशकों से शरद पवार परिवार का गढ़ रहा है, अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एक नई दिशा देखेगा।
अजित पवार के निधन के बाद वहां की जनता भावनात्मक रूप से सुनेत्रा के साथ खड़ी दिख रही है।
स्थानीय नेताओं का कहना है कि वे “अजितदादा के अधूरे सपनों को पूरा करने” की जिम्मेदारी निभाएंगी।
उनके उपमुख्यमंत्री बनने के बाद बारामती में जश्न और श्रद्धांजलि दोनों माहौल एक साथ देखने को मिला।

सुनेत्रा पवार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ऐसे समय में की है जब परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण हैं।
पति अजित पवार के निधन की गहरी व्यक्तिगत क्षति के बावजूद उन्होंने दृढ़ता और संयम के साथ राज्य की जिम्मेदारी स्वीकार की।
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि आने वाले समय में उनका प्रदर्शन न केवल एनसीपी बल्कि पूरे राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।
उनका यह उदय एक उदाहरण है कि कैसे निजी दुःख को सार्वजनिक सेवा के संकल्प में बदला जा सकता है।

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