जनपद बांदा में मतदाता सूची से कथित तौर पर मुस्लिम समाज के लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर समाजवादी पार्टी ने सरकार और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और नरैनी तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा के नेतृत्व में किया गया। बड़ी संख्या में सपाई कार्यकर्ता तहसील पहुंचे, जहां उन्होंने धरना-प्रदर्शन करते हुए सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में नजर आया और प्रशासन के माध्यम से निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन सौंपा गया।
समाजवादी पार्टी नेताओं का आरोप है कि नरैनी तहसील क्षेत्र के कुल 33 बूथों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। पार्टी का दावा है कि इनमें अधिकांश नाम मुस्लिम समाज से जुड़े मतदाताओं के हैं। सपाइयों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी तकनीकी त्रुटि का परिणाम नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई है, ताकि एक विशेष वर्ग को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सके।
सपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वे सभी संबंधित गांवों के मूल निवासी हैं। उनके नाम न सिर्फ वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज थे, बल्कि हाल ही में जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में भी शामिल थे। इसके बावजूद फॉर्म-7 का गलत तरीके से इस्तेमाल कर उनके नाम हटाए जाने की कार्रवाई की गई, जो बेहद गंभीर मामला है।
प्रदर्शन के दौरान सपाइयों ने कहा कि लोकतंत्र में वोट का अधिकार सबसे बड़ा अधिकार है और यदि किसी वर्ग विशेष के मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा ने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर दबने नहीं देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मतदाता सूची से हटाए गए सभी नाम दोबारा नहीं जोड़े गए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो पार्टी बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि निर्वाचन आयोग इस मामले का तत्काल संज्ञान ले, दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम बिना कारण मतदाता सूची से न हटाया जाए।
फिलहाल इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आया, वहीं राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखना यह होगा कि निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और प्रभावित मतदाताओं को कब तक राहत मिलती है।
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