महराजगंज।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली कस्बे में जीएसटी इंटेलिजेंस लखनऊ की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ट्रांसपोर्ट कार्यालय पर करीब 10 घंटे तक सघन छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। कार्रवाई के केंद्र में ट्रांसपोर्ट संचालक बंटी सिंह को हिरासत में लिया गया है, जिनसे जीएसटी चोरी और फर्जी रिफंड के कथित नेटवर्क को लेकर पूछताछ जारी है।
सीमा क्षेत्र में संदिग्ध लेनदेन की जांच
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी को लंबे समय से सीमा क्षेत्र में संचालित कुछ फर्मों के वित्तीय लेनदेन पर संदेह था। प्रारंभिक इनपुट में संकेत मिले थे कि ट्रांसपोर्ट और संबंधित व्यापारिक गतिविधियों के माध्यम से इनवॉइसिंग में हेराफेरी, फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दुरुपयोग की आशंका है। इसी आधार पर जीएसटी इंटेलिजेंस लखनऊ की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया।
टीम ने पहले नौतनवा स्थित आवासीय परिसर से संचालक को पूछताछ के लिए अपने साथ लिया और इसके बाद सोनौली स्थित ट्रांसपोर्ट कार्यालय में एक साथ दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू की। कार्रवाई देर रात तक चलती रही, जिससे पूरे इलाके में हलचल मची रही।
10 घंटे की मैराथन रेड
अधिकारियों ने कार्यालय के कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और लेखा-जोखा से जुड़े दस्तावेजों को सीज किया। बताया जा रहा है कि कई फर्मों के नाम पर किए गए लेनदेन, बैंक खातों और रिफंड क्लेम से संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। प्राथमिक स्तर पर करोड़ों रुपये के लेनदेन की पड़ताल की बात सामने आ रही है, हालांकि आधिकारिक रूप से रकम का खुलासा नहीं किया गया है।
छापेमारी के दौरान टीम ने स्टॉक रजिस्टर, ई-वे बिल, जीएसटी रिटर्न और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कागजात का मिलान भी किया। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फर्जी रिफंड और जीएसटी चोरी की आशंका
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ फर्मों के माध्यम से फर्जी खरीद-बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया हो सकता है। साथ ही निर्यात या सीमा पार आपूर्ति से जुड़े कागजों के आधार पर फर्जी रिफंड लेने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो यह संगठित कर चोरी का बड़ा मामला साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कारोबार के माध्यम से टैक्स चोरी के नेटवर्क संचालित होने की संभावना रहती है, क्योंकि यहां माल की आवाजाही अधिक होती है और विभिन्न राज्यों व देशों के बीच लेनदेन होता है।
कई खातों की जांच, नेटवर्क की पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी कई फर्मों के बैंक खातों और जीएसटी रजिस्ट्रेशन की भी जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या ये फर्में वास्तविक व्यापार कर रही थीं या केवल कागजों पर मौजूद थीं। शेल कंपनियों के माध्यम से फर्जी बिलिंग कर टैक्स रिफंड लेने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई जाती हैं तो अन्य संबंधित व्यक्तियों और कारोबारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई भी संभव है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज
सोनौली जैसे व्यस्त सीमा कस्बे में इतनी बड़ी कार्रवाई से व्यापारिक समुदाय में चर्चा का माहौल है। कई कारोबारी अब अपने दस्तावेजों और कर अनुपालन को लेकर सतर्क हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कर चोरी का नेटवर्क उजागर होता है तो यह राजस्व के बड़े नुकसान का मामला हो सकता है।
आधिकारिक खुलासे की प्रतीक्षा
फिलहाल जीएसटी इंटेलिजेंस की टीम जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की जांच में जुटी है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि विस्तृत जांच के बाद आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा। माना जा रहा है कि दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिनमें फर्जी रिफंड की रकम और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम सामने आ सकते हैं।
भारत-नेपाल सीमा के इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर हुई यह कार्रवाई कर चोरी के खिलाफ सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और संभावित आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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