उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के सुकैया गांव में वन विभाग के कुछ कर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। गांव के एक परिवार ने आरोप लगाया है कि लकड़ी चोरी के नाम पर वन विभाग के कर्मचारियों ने न केवल उन्हें डराया-धमकाया बल्कि घर में घुसकर मारपीट और लूटपाट भी की। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि ककरदरी रेंज के कुछ वनकर्मी गांव में पहुंचे और लकड़ी चोरी का आरोप लगाते हुए उन्हें धमकाने लगे। परिवार के लोगों के मुताबिक उन्होंने आरोपों का विरोध किया और कहा कि उन्होंने कोई अवैध लकड़ी नहीं काटी है। इसके बावजूद वनकर्मियों ने कथित तौर पर जबरदस्ती घर में घुसकर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की।
पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान घर में मौजूद सामान के साथ भी छेड़छाड़ की गई और कुछ सामान उठा ले जाने की भी बात सामने आई है। घटना के समय घर में महिलाएं और बच्चे भी मौजूद थे, जिससे पूरे परिवार में दहशत का माहौल बन गया। मारपीट के कारण परिवार के कुछ लोगों को चोटें भी आईं।
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल सका। इससे नाराज होकर पीड़ित ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी वनकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित का कहना है कि जिन लोगों पर वन संरक्षण की जिम्मेदारी है, वही यदि इस तरह की हरकत करेंगे तो आम लोगों का भरोसा प्रशासन पर कैसे बना रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि लकड़ी चोरी के नाम पर उन्हें बेवजह प्रताड़ित किया गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
इस घटना के बाद गांव के अन्य लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर आरोप सही हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि ककरदरी रेंज के जिन वनकर्मियों पर आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाए।
मामले में यह भी बताया जा रहा है कि जांच की जिम्मेदारी क्षेत्र के डीएसपी को सौंपी गई है, लेकिन जांच की धीमी रफ्तार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के कई दिन बाद भी कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने का मौका न मिले।
फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उन्हें जल्द न्याय मिलेगा और दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।
बाइट: पीड़ित परिवार / ग्रामीण
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