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Budget 2026: नॉर्थ ईस्ट को सरकार के पिटारे से क्या-क्या मिला? यहां जानें डिटेल

नॉर्थ ईस्ट के विकास को नई उड़ान: निर्मला सीतारमण के बजट 2026 में उत्तर-पूर्व के लिए बड़ा ऐलान

नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026 – केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में देश का सामान्य बजट 2026-27 पेश किया। यह उनका नौवां बजट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का पंद्रहवां बजट था। करीब डेढ़ घंटे तक चले अपने भाषण में वित्त मंत्री ने देश के हर क्षेत्र, वर्ग और राज्य को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
लेकिन इस बजट में जो सबसे खास बात रही, वह थी नॉर्थ ईस्ट (उत्तर-पूर्वी राज्यों) के विकास के लिए की गई घोषणाएं।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को लंबे समय से देश का ‘अविकसित लेकिन संभावनाओं से भरा क्षेत्र’ कहा जाता रहा है। केंद्र सरकार लगातार इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इस बार के बजट ने इन प्रयासों को और मजबूत किया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि नॉर्थ ईस्ट को इस बजट में क्या-क्या मिला है और सरकार की क्या प्राथमिकताएं हैं।


4,000 इलेक्ट्रिक बसें होंगी शुरू – स्वच्छ परिवहन की ओर कदम

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि नॉर्थ ईस्ट के शहरी और पहाड़ी इलाकों में लोगों की यात्रा को आसान बनाने के लिए सरकार कुल 4,000 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने जा रही है।
ये बसें न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगी बल्कि पहाड़ी इलाकों में स्वच्छ और शांत परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगी।

इलेक्ट्रिक बस परियोजना से असम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों को विशेष लाभ होगा। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले तीन वर्षों में नॉर्थ ईस्ट के लगभग सभी प्रमुख शहरों को इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जोड़ा जाए।

परिवहन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस परियोजना से करीब 25,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे। इसके अलावा, इन बसों से कार्बन उत्सर्जन में हर साल लगभग 2 लाख टन की कमी आने का अनुमान है।


नेशनल डिजाइन इंस्टीट्यूट – स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

सीतारमण ने बजट भाषण में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की – नॉर्थ ईस्ट में एक नेशनल डिजाइन इंस्टीट्यूट (NDI) स्थापित किया जाएगा।
इस संस्थान का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को डिजाइन, फैशन, टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज में आधुनिक प्रशिक्षण देना है।

नॉर्थ ईस्ट लंबे समय से अपनी हैंडलूम और हस्तशिल्प कला, बांस उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है। इस संस्थान से क्षेत्र की पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।
सरकार की योजना है कि यह संस्थान गुवाहाटी या शिलांग में स्थापित किया जाए, जहाँ से क्षेत्र के सभी राज्यों को आसानी से जोड़ा जा सके।

वित्त मंत्री ने कहा कि “नॉर्थ ईस्ट भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यहाँ की कला और डिजाइन को बढ़ावा देना ‘वोकल फॉर लोकल’ के सिद्धांत को सशक्त करेगा।”


बौद्ध सर्किट – धार्मिक पर्यटन को नई दिशा

सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के छह राज्यों में बौद्ध सर्किट विकसित करने की घोषणा की है।
इस योजना के तहत अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम के प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों को सड़क और वायु मार्ग से जोड़ा जाएगा।

बौद्ध सर्किट के विकास से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन, होटल उद्योग, स्थानीय व्यवसाय और हस्तशिल्प बाजारों को नई गति मिलेगी।
साथ ही, यह परियोजना भारत-भूटान-नेपाल-म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करेगी।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दो वर्षों में बौद्ध सर्किट के पहले चरण का काम पूरा हो जाए। इसके लिए केंद्र सरकार ने लगभग ₹1,500 करोड़ का प्रावधान किया है।


इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर भी जोर

हालांकि वित्त मंत्री ने अपने भाषण में सीधे तौर पर कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का नाम नहीं लिया, लेकिन बजट दस्तावेज़ के अनुसार, नॉर्थ ईस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NEIDS) के तहत ₹8,000 करोड़ की राशि इस वर्ष के लिए निर्धारित की गई है।

इसमें शामिल हैं:

  • नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ

  • रेलवे नेटवर्क विस्तार (जैसे सिलचर से इम्फाल, और गुवाहाटी से पासीघाट तक)

  • हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण, विशेष रूप से ईटानगर, आइजोल और शिलांग में

  • ग्रामीण इलाकों में डिजिटल कनेक्टिविटी मिशन के तहत फाइबर नेटवर्क बिछाने की योजना

इससे न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुँच भी बेहतर होगी।


कृषि और स्थानीय उत्पादों पर विशेष ध्यान

नॉर्थ ईस्ट की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है।
इस बात को ध्यान में रखते हुए बजट में ऑर्गेनिक फार्मिंग, बांस आधारित उद्योगों और स्थानीय फल-सब्जी प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए विशेष फंडिंग की घोषणा की गई है।

सरकार का उद्देश्य है कि नॉर्थ ईस्ट के किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए और उनके उत्पादों को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)’ के तहत अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए।


शिक्षा, स्वास्थ्य और स्किल डेवलपमेंट में भी निवेश

वित्त मंत्री ने बताया कि नॉर्थ ईस्ट के युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने के लिए 100 नए स्किल ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे।
साथ ही, क्षेत्र के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ डॉक्टरों से लैस करने के लिए ₹3,200 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आने वाले वर्ष में असम यूनिवर्सिटी और मणिपुर यूनिवर्सिटी में रिसर्च फंडिंग दोगुनी की जाएगी, ताकि स्थानीय विद्यार्थी उच्च शिक्षा में आगे बढ़ सकें।


सरकार का विज़न – नॉर्थ ईस्ट को ‘ग्रॉथ इंजन’ बनाना

मोदी सरकार की लगातार कोशिश रही है कि नॉर्थ ईस्ट को “देश का ग्रोथ इंजन” बनाया जाए।
प्रधानमंत्री स्वयं कई बार कह चुके हैं कि “देश का समग्र विकास तभी संभव है जब नॉर्थ ईस्ट तरक्की करेगा।”

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने नॉर्थ ईस्ट में सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क के विस्तार, पर्यटन को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।
इस बार का बजट इन सभी प्रयासों को आगे बढ़ाता है और स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में नॉर्थ ईस्ट भारत के आर्थिक विकास का एक अहम केंद्र बनने जा रहा है।

कुल मिलाकर, बजट 2026-27 नॉर्थ ईस्ट के लिए उम्मीदों से भरा है।
4,000 इलेक्ट्रिक बसें, नेशनल डिजाइन इंस्टीट्यूट, बौद्ध सर्किट, और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जैसे कदम न केवल इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को मज़बूत करेंगे, बल्कि यहाँ के युवाओं को भी नए अवसर देंगे।

सरकार का फोकस इस बात पर है कि नॉर्थ ईस्ट अब ‘दूरस्थ इलाका’ नहीं, बल्कि भारत के विकास का अभिन्न हिस्सा बनकर उभरे।

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