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Newborn Health-घुट्टी नवजात बच्चों के जीवन पर डाल रही है हानिकारक असर, बच्चों के जीवन को संवारने का काम करेगी आईएपी

नवजात बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक मुद्दे पर आज अलीगढ़ में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स यानी आईएपी अलीगढ़ इकाई द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा कि नवजात बच्चों को घुट्टी देना बेहद खतरनाक है और यह उनकी जान के लिए भी खतरा बन सकता है। आईएपी ने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है।

आईएपी अलीगढ़ इकाई द्वारा आयोजित इस प्रेस वार्ता में शहर के कई वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी विशेषज्ञों ने बारी-बारी से बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं और उनके समाधान पर अपने विचार साझा किए।

जेएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर यूसुफ ने बताया कि नवजात बच्चों को घुट्टी देना अत्यंत हानिकारक होता है। उन्होंने कहा कि घुट्टी देने से बच्चों की आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचता है और कई मामलों में आंतें फटने तक की स्थिति बन जाती है। डॉक्टर यूसुफ के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में आए दिन ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें नवजात बच्चों को गंभीर हालत में भर्ती कराया जाता है और उनका इलाज करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बंसल ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने के उद्देश्य से आईएपी द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों में जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से माता-पिता को बच्चों की सही देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि वे गलत परंपराओं और भ्रांतियों से बच सकें।

इसी क्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई.के. द्विवेदी ने एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि जन्म से लेकर दो वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखना बेहद जरूरी है। यदि इस उम्र में बच्चे मोबाइल देखते हैं, तो उनमें बोलने और समझने की क्षमता प्रभावित होती है। आजकल ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें बच्चे देर से बोलना शुरू करते हैं या बिल्कुल नहीं बोल पाते।

बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने और समय रहते उनके समाधान के उद्देश्य से आईएपी अलीगढ़ इकाई द्वारा 22 फरवरी को पन्नालाल अस्पताल में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा बच्चों और अभिभावकों को निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा।

आईएपी अलीगढ़ इकाई ने स्पष्ट किया कि बच्चों के भविष्य की सुरक्षा और उनके स्वस्थ विकास के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे। विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सलाह को अपनाएं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें।

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