चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर अष्टमी तिथि के दिन औरैया जनपद में भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। जिलेभर के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
महामाई मंदिर बना आस्था का केंद्र
अष्टमी के अवसर पर दिबियापुर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित गाहेसर गांव का प्रसिद्ध महामाई मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। यहां सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें लग गईं। दूर-दराज के गांवों और कस्बों से आए भक्त अनुशासन के साथ लाइन में लगकर माता के दर्शन करते नजर आए। मंदिर परिसर में इतनी भीड़ थी कि हर तरफ सिर्फ श्रद्धालु ही दिखाई दे रहे थे।
मंदिर में दर्शन के लिए आए भक्त अपने साथ झंडा और जवारे लेकर पहुंचे और माता के चरणों में अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, यही वजह है कि हर साल यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन
अष्टमी के दिन जिलेभर में कन्या पूजन का विशेष महत्व देखा गया। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने अपने घरों और मंदिरों में छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया। उनके पैर पखारे, तिलक लगाया और उन्हें भोजन कराकर आशीर्वाद लिया। इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
कई स्थानों पर भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया, जहां भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूरे दिन श्रद्धालुओं को भोजन कराया गया और सेवा का भाव देखने को मिला।
बाना और दंडवत यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
महामाई मंदिर में इस दौरान बाना लगवाकर नृत्य करते हुए दंडवत यात्रा करने वाले भक्तों का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमीन पर दंडवत करते हुए मंदिर की ओर बढ़ते नजर आए। यह दृश्य इतना भावपूर्ण था कि वहां मौजूद अन्य श्रद्धालु भी भाव-विभोर हो उठे।
श्रद्धालुओं की आस्था अटूट
मंदिर में दर्शन करने पहुंची एक श्रद्धालु ने बताया कि वह बचपन से ही यहां माता के दर्शन करने आती रही हैं और उनकी माता रानी में अटूट आस्था है। उन्होंने कहा कि माता से मांगी गई हर मनोकामना अब तक पूरी हुई है, इसलिए हर नवरात्र में वह यहां जरूर आती हैं।
प्रशासन रहा मुस्तैद
भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती की गई थी और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रही और किसी को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
निष्कर्ष
औरैया में चैत्र नवरात्र की अष्टमी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि लोगों की आस्था आज भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है। कन्या पूजन, भंडारे और भक्ति से सराबोर इस आयोजन ने पूरे जिले को एक आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। मां दुर्गा के जयकारों के साथ दिनभर वातावरण भक्तिमय बना रहा और हर श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेकर अपने घर लौटा।
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