जिले के तिकुनिया क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक गंभीर समस्या सामने आई है, जहां ग्राम पंचायत सुथना बरसोला में स्थित महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज तक जाने वाला मुख्य मार्ग लंबे समय से गंदे और बदबूदार पानी से भरा हुआ है। इस समस्या के कारण स्कूल जाने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं रोजाना भारी परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। हालात ऐसे बन चुके हैं कि पढ़ाई के लिए निकलने वाले बच्चों को बीमारी, दुर्घटना और गंदगी के बीच से होकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।

सड़क नहीं, बना गंदे पानी का तालाब
ग्रामीणों के अनुसार महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज को जाने वाली सड़क कई महीनों से जलभराव की समस्या से जूझ रही है। सड़क पर नालियों का पानी जमा हो गया है, जो अब सड़कर बदबू फैलाने लगा है। पानी में कचरा, कीचड़ और कीड़े-मकोड़े पनप चुके हैं, जिससे पूरा इलाका अस्वच्छ और असुरक्षित हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता गांव के बच्चों के लिए स्कूल पहुंचने का मुख्य मार्ग है। हर दिन दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों छात्र इसी रास्ते से गुजरते हैं। लेकिन जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण सड़क अब दलदल जैसी बन चुकी है।
गंदगी से होकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
सुबह स्कूल समय में बच्चों का दृश्य बेहद चिंताजनक होता है। छोटे-छोटे बच्चे अपनी यूनिफॉर्म संभालते हुए गंदे पानी में पैर रखकर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। कई बार संतुलन बिगड़ने से बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गिरने के कारण बच्चों की ड्रेस गंदी हो जाती है और उनके बैग में रखी कॉपियां व किताबें भी भीग जाती हैं। इससे बच्चों का मनोबल टूट रहा है और कई छात्र स्कूल जाने से कतराने लगे हैं।
एक अभिभावक ने बताया,
“हम अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन रोज गंदे पानी से गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे रोते हुए घर लौट आते हैं।”
स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा गंभीर असर
गंदे पानी में लंबे समय तक आवाजाही के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बच्चों को त्वचा संबंधी समस्याएं, बुखार और संक्रमण जैसी शिकायतें होने लगी हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गंदे पानी में मौजूद बैक्टीरिया और मच्छरों के कारण डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्कूल मार्ग पर जलभराव बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
जिम्मेदारों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस समस्या की शिकायत कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी समस्या से अवगत होने के बावजूद अनदेखी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। कई बार मौखिक शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
एक ग्रामीण ने नाराजगी जताते हुए कहा,
“चुनाव के समय सभी लोग गांव में आते हैं, लेकिन अब बच्चों की परेशानी देखने वाला कोई नहीं है।”
स्कूल प्रशासन पर भी उठे सवाल
महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज के जिम्मेदार लोगों पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन इस समस्या से पूरी तरह परिचित है, फिर भी प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल नहीं की गई।
अभिभावकों का मानना है कि यदि स्कूल प्रशासन उच्च अधिकारियों को लिखित सूचना देता, तो शायद समस्या का समाधान जल्द हो सकता था।
शिक्षा पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव
इस समस्या का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने बताया कि छोटे बच्चों को गंदे रास्ते से भेजना जोखिम भरा होने के कारण कुछ दिनों में उनकी उपस्थिति कम हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पहले ही शिक्षा को लेकर कई चुनौतियां हैं। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों की पढ़ाई को और प्रभावित करती है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि:
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सड़क से जलभराव तुरंत हटाया जाए
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नालियों की सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था की जाए
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सड़क की मरम्मत कर उसे सुरक्षित बनाया जाए
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स्कूल मार्ग को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाए
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से प्रशासनिक कार्यालय पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
आखिर कब मिलेगी राहत?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब स्कूल जाने वाले बच्चों को इस समस्या से राहत मिलेगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को प्राथमिकता देंगे या फिर यह समस्या यूं ही बनी रहेगी?
गांव के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर जल्द कार्रवाई करेगा, ताकि बच्चों को गंदगी और बीमारी के बीच से गुजरकर शिक्षा प्राप्त करने की मजबूरी से छुटकारा मिल सके।
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र की यह स्थिति ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर सामने लाती है। जहां एक ओर सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए गंदगी भरे रास्तों से गुजरना पड़ रहा है।
यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह केवल एक सड़क की समस्या नहीं बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग कब जागते हैं और मासूम बच्चों को इस परेशानी से कब राहत मिलती है।
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