कानपुर नगर के चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बसेन में दलित महिला और उसके पुत्र के साथ कथित रूप से कुछ दबंगों द्वारा हिंसक हमला किया गया। घटना में पीड़ित महिला को गंभीर चोटें आई हैं और दोनों को धमकी दी गई कि वे अपने घर और गांव को खाली कर दें।

पीड़ित महिला और उनके पुत्र ने बताया कि कुछ दबंगों ने उन्हें जातिगत गालियां देते हुए बेरहमी से मारपीट की। मारपीट के दौरान महिला के सीने में गंभीर चोट आई, जिससे उसकी हालत गंभीर बनी। वहीं, पुत्र को भी मानसिक और शारीरिक रूप से चोटें पहुँची हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि यह हमला उनकी जाति और सामाजिक स्थिति को लेकर किया गया।
पीड़ित महिला ने घटना के बाद चौबेपुर थाना में प्रार्थना पत्र दर्ज कराया। प्रार्थना पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने शिकायत दर्ज कराई, तो थाना में बुलाकर दरोगा ने जांच के बहाने उन्हें समझौते के कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। पीड़ित महिला का कहना है कि यह समझौता उन्हें मजबूरन कराया गया और यह प्रक्रिया पूरी तरह अवैध और अनुचित थी।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
पीड़ित महिला और उसके पुत्र ने बताया कि वे इस मामले को कानपुर कमिश्नर तक ले जाएंगे, ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि इस तरह की जातिगत हिंसा और दबंगई समाज में भय का वातावरण पैदा करती है और कानूनी कार्रवाई की सख्त आवश्यकता है।
पीड़ित का बयान
पीड़ित महिला के पुत्र शिवम कुरील ने बताया, “हम अपने घर और गांव में सुरक्षित रहना चाहते हैं। लेकिन दबंगों की धमकियों और मारपीट से हमारी जिंदगी खतरे में है। पुलिस द्वारा किया गया मजबूरन समझौता हमें स्वीकार नहीं है। हम कानपुर कमिश्नर से न्याय की गुहार लगाएंगे।”
स्थानीय और सामाजिक प्रभाव
ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना गांव में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर रही है। लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े हैं और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि दोषियों को पकड़कर उचित सजा दी जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल पीड़ित परिवार की सुरक्षा खतरे में आती है, बल्कि समाज में जातिगत भेदभाव और हिंसा को बढ़ावा मिलता है। इसलिए प्रशासन और पुलिस दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे मामलों में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जाए।
आगे की संभावनाएँ और प्रशासनिक कदम
चौबेपुर थाना प्रशासन ने फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि पीड़ित का आरोप है कि जांच के बहाने उन्हें समझौते पर हस्ताक्षर कराया गया। अब मामला कानपुर कमिश्नर के कार्यालय तक पहुँचाने की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में कानूनी धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई और दोषियों की गिरफ्तारी अनिवार्य है। साथ ही, पीड़ित परिवार की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन को कदम उठाने होंगे।
इस पूरे मामले ने समाज में एक बार फिर जातिगत हिंसा और दबंगई के मुद्दे को उजागर किया है। नागरिक और सामाजिक संगठन अब इस घटना पर निगरानी रख रहे हैं और प्रशासन से न्याय सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
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