कन्नौज में मंदिर निर्माण की खुदाई के दौरान मिला प्राचीन कुआँ, सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में बढ़ी श्रद्धालुओं की आस्था
स्थान: कन्नौज, उत्तर प्रदेश
संवाददाता: अंकित श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश के इत्र नगरी कन्नौज से आस्था, इतिहास और रहस्य से जुड़ी एक बेहद रोचक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। नगर के मकरन्द नगर स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर परिसर में मंदिर के शिखर निर्माण के लिए चल रही खुदाई के दौरान एक प्राचीन कुएं का पता चला है। इस खोज ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के बीच उत्सुकता और श्रद्धा का माहौल पैदा कर दिया है।
मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोगों का दावा है कि यह कुआँ सदियों पुराना है और मां फूलमती देवी के प्रांगण में पहले कुल सात प्राचीन कुएं मौजूद थे। खुदाई में एक कुआँ मिलने के बाद अब शेष छह कुओं के भी जमीन के भीतर होने की संभावना जताई जा रही है।
शिखर निर्माण के दौरान हुआ ऐतिहासिक खुलासा
जानकारी के अनुसार सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में इन दिनों मंदिर के शिखर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी निर्माण कार्य के तहत मंदिर परिसर में जमीन की खुदाई की जा रही थी। खुदाई के दौरान मजदूरों को जमीन के भीतर गोलाकार संरचना दिखाई दी, जिसके बाद काम रोककर सावधानीपूर्वक मिट्टी हटाई गई।
जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ी, एक प्राचीन कुएं की संरचना स्पष्ट होती गई। कुएं की बनावट और उसकी ईंटों की संरचना देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि यह काफी प्राचीन काल का हो सकता है। सूचना मिलते ही मंदिर प्रशासन, स्थानीय श्रद्धालु और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए।
पुजारी का दावा — परिसर में थे सात पवित्र कुएं
मंदिर के पुजारी शिखर मिश्रा ने बताया कि प्राचीन मान्यताओं और मंदिर की परंपराओं के अनुसार मां फूलमती देवी मंदिर परिसर में पहले सात पवित्र कुएं हुआ करते थे। समय के साथ ये कुएं मिट्टी और निर्माण कार्यों के कारण जमीन के भीतर दब गए।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इन कुओं का पानी अत्यंत पवित्र और औषधीय गुणों से युक्त माना जाता था। स्थानीय लोग इसे “अमृत तुल्य जल” मानते थे और विभिन्न बीमारियों से राहत पाने के लिए इसका उपयोग करते थे।
‘अमृत समान’ पानी की मान्यता
पुजारी और श्रद्धालुओं के अनुसार इन कुओं के पानी में विशेष प्रभाव माना जाता है। मान्यता है कि इस जल के सेवन से शरीर की कई बीमारियां ठीक हो जाती थीं। लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते थे और घर ले जाकर भी उपयोग करते थे।
हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन आस्था और परंपरा के आधार पर भक्तों की श्रद्धा इस खोज के बाद और अधिक बढ़ गई है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
प्राचीन कुआं मिलने की खबर फैलते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। आसपास के इलाकों से लोग इस ऐतिहासिक स्थल को देखने पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे देवी मां का चमत्कार मान रहे हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि मां फूलमती देवी मंदिर पहले से ही क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल रहा है, लेकिन इस खोज के बाद यहां आने वाले भक्तों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है।
ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कुआं वास्तव में प्राचीन काल का है, तो इसका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व काफी बड़ा हो सकता है। कन्नौज का इतिहास प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़ा रहा है। ऐसे में मंदिर परिसर में प्राचीन जल संरचनाओं का मिलना उस दौर की जल संरक्षण प्रणाली और स्थापत्य कला की जानकारी दे सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पुरातत्व विभाग की टीम बुलाकर इस स्थल का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए ताकि इसकी वास्तविक आयु और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाया जा सके।
बाकी छह कुओं के मिलने की संभावना
खुदाई के दौरान मिले संकेतों के आधार पर मंदिर प्रशासन का मानना है कि परिसर के अंदर अन्य कुएं भी मौजूद हो सकते हैं। निर्माण कार्य फिलहाल सावधानीपूर्वक किया जा रहा है ताकि किसी ऐतिहासिक संरचना को नुकसान न पहुंचे।
यदि आगे खुदाई में अन्य कुएं भी मिलते हैं, तो यह खोज कन्नौज के धार्मिक और ऐतिहासिक नक्शे पर एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
इत्र नगरी की पहचान से जुड़ा धार्मिक स्थल
मकरन्द नगर स्थित सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर कन्नौज के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, विशेष रूप से नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर की प्राचीनता और उससे जुड़ी मान्यताएं इसे क्षेत्र की आस्था का केंद्र बनाती हैं। अब प्राचीन कुएं की खोज ने इस मंदिर को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
प्रशासन की नजर
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया है। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही संबंधित विभागों की टीम मौके का निरीक्षण करेगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण कार्य के दौरान किसी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान न पहुंचे।
आस्था और इतिहास का संगम
मां फूलमती देवी मंदिर में प्राचीन कुएं की खोज ने आस्था और इतिहास को एक साथ जोड़ दिया है। जहां श्रद्धालु इसे देवी मां की कृपा और चमत्कार मान रहे हैं, वहीं इतिहासकार और विशेषज्ञ इसे प्राचीन सभ्यता के प्रमाण के रूप में देख रहे हैं।
निष्कर्ष
कन्नौज के सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में खुदाई के दौरान मिला प्राचीन कुआं एक साधारण घटना नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण खोज साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यदि अन्य कुएं भी मिलते हैं और वैज्ञानिक जांच होती है, तो यह स्थल प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
फिलहाल यह खोज श्रद्धालुओं के लिए आस्था का नया केंद्र बन चुकी है और पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा जोरों पर है।
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